पद्म भूषण से सम्मानित और महिला समाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट का 89 की उम्र में निधन
पद्म भूषण से सम्मानित और महिला समाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने आखिरी सांस बुधवार को ली। इला भट्ट एक प्रसिद्ध गांधीवादी थीं। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की वकालत थी।इला भट्ट ने भारत में स्व-नियोजित महिला संघ (SEWA) की स्थापना और नेतृत्व किया। महिलाओं के आर्थिक कल्याण के लिए उन्होंने 1973 में भारत के पहले महिला बैंक, सहकारी बैंक ऑफ SEWA की स्थापना की। उन्होंने 1979 में महिला विश्व बैंकिंग की सह-स्थापना भी की।

1985 में किया गया था पद्म श्री से सम्मानित
इला भट्ट को 1985 में भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री और 1986 में तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें 2011 में गांधी शांति पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें रेमन पुरस्कार भी मिला। वहीं, 1977 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए उन्हें मैगसेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जताया दु:ख
इला भट्ट के निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी दु:ख जताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा-प्रसिद्ध गांधीवादी और सेवा की संस्थापक इला भट्ट जी के निधन से अत्यंत दुखी हूं। पद्म भूषण प्राप्तकर्ता और महिलाओं के अधिकारों की अग्रणी भट्ट ने जमीनी स्तर पर उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए खुद का जीवन समर्पित कर दिया। उनकी असाधारण विरासत हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। इसके अलावा उनके निधन पर कांगेस नेता जयराम रमेश ने भी दुख जताया।द एल्डर्स के साथ भी करने को
लेकर होती है भट्ट की पहचान
इला भट्ट को द एल्डर्स के साथ उनके काम के लिए भी जाना जाता है। द एल्डर्स 2007 में नेल्सन मंडेला द्वारा एक साथ लाए गए वरिष्ठ राजनेताओं, शांति कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार अधिवक्ताओं का एक वैश्विक गैर-सरकारी संगठन है। इला भट्ट द एल्डर्स की संस्थापक सदस्य थीं। 2007 से 2016 तक इला भट्ट ने लैंगिक समानता और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को मिटाने जैसे मुद्दों पर संगठन के साथ काम किया।
इला भट्ट की पहचान एक 'सौम्य क्रांतिकारी' के रूप में भी होती है। इला भट्ट माइक्रोफाइनेंस आंदोलन के शुरुआती नेताओं में से एक थीं। उनके काम में मुख्य रूप से महिलाओं को आर्थिक रूप से साक्षर और सशक्त बनाना शामिल था। उन्होंने दस वर्षों से अधिक समय तक रॉकफेलर फाउंडेशन के ट्रस्टी के रूप में भी काम किया है।
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