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H-20 Bomber: चीनी ड्रैगन ने बनाया हवा की ताकत से उड़ने वाला बॉम्बर, हिमालय में भारत को टेंशन

वर्तमान में चीन J-20 और FC-31 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर्स के संचालन करने का दावा करता है, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हिमालय में उनके सीमा विवादों में किया जा सकता है।

बीजिंग, जुलाई 16: भारत के जानी दुश्मन चीन ने आखिरकार पहला इंटरकॉन्टिनेंटल डीप स्ट्राइकर बॉम्बर एच-20 फाइटर जेट तैयार कर लिया है और जाहिर तौर पर चीन के इस महाशक्ति फाइटर जेट ने इंडो- पैसिफिक के साथ साथ अमेरका को भी टेंशन में डाल दिया है। इस फाइटर जेट को क्यों आसमान का राक्षस कहा गया है,इसकी ताकत देखकर आप बहुत आसानी से समझ सकते हैं। चीन का ये डीप स्ट्राइकर बॉम्बर आसमान से पारंपरिक बमों के साथ साथ परमाणु बम, हाइपरसोनिक स्टील्थ क्रूज मिसाइलों को भी लांच कर सकता है और निश्चित तौर पर भारत और अमेरिका के लिए ये एक टेंशन वाली खबर है।

आसमान का 'राक्षस' है एच-20

आसमान का 'राक्षस' है एच-20

चीन ने अपने इस एच-20 फाइटर जेट का निर्माण अत्यंत ही गोपनीयता के साथ किया है, लिहाजा इस फाइटर जेट की कई क्षमताओं से अभी तक दुनिया अनजान है। हाल ही में कुछ चीनी रिपोर्टों में केवल सामरिक और ऐतिहासिक महत्व के विशिष्ट प्रकार के विमानों के आने का उल्लेख किया गया है। लेकिन, चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन, जिसे नोरिन्को भी कहा जाता है, उसने अपनी मॉडर्न वेपनरी मासिक पत्रिका में इस फाइटर जेट को लेकर कुछ तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों को देखने से पता चलता है, कि फाइटर जेट एच-20 के पास एक फ्लाइंग विंग डिज़ाइन, एक हथियार बे, दो एडजस्टेबल टेल विंग्स और एक फ्रंटल एयरबोर्न रडार है। इसके साथ ही इस फाइटर जेट में स्टील्थ एयर इनटेक भी लगा हुआ है और इसे डार्क ग्रे रडार अवशोषक सामग्री से कवर कर दिया गया है, जिससे विमान के रडार का दिखना काफी कम हो गया है।

काफी ज्यादा क्यों है खतरनाक?

काफी ज्यादा क्यों है खतरनाक?

इस फाइटर जेट को खतरनाक बनाती है, इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी। क्योंकि, स्टील्थ होने की वजह से इस फाइटर जेट को सामान्य रडार पकड़ नहीं सकते हैं, लिहाजा इसके सफल परीक्षण हो जाने के बाद सबसे ज्यादा खतरा भारत के लिए ही होगा और टेंशन अमेरिका को भी है। चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ने जो तस्वीरें जारी की हैं, उसे देखने पर पता चलता है, कि एच-20 बॉम्बर काफी हद तक चीन के बी-2 बॉम्बर के जैसा दिखता है। दोनों तरफ एयर इंटेक होने की वजह से ये दोनों तरफ से हवा खींच सकता है और जब एयर इंटेक के जरिए हवा इस फाइटर जेट के इंजन तक पहुंचती है, तो हवा फ्यूल के साथ मिलकर ईंजन को महाशक्तिशाली बना देती है।

करीब 5 हजार मील मारक क्षमता

करीब 5 हजार मील मारक क्षमता

वारजोन की रिपोर्ट के मुताबिक, एच-20 बॉम्बर फाइटर जेट की मारक क्षमता करीब 4 हजार से 5 हजार मील के बीच हो सकती है और ये अपने साथ विध्वंसक हथियारों को काफी आसानी के साथ लेकर उड़ान भरने में सक्षम है। एच-20 बॉम्बर फाइटर जेट स्मार्ट बम, लैंड-अटैक क्रूज़ मिसाइल और एंटी-शिप मिसाइल जैसे सटीक-निर्देशित हथियारों की एक विस्तृत श्रृंखला ले जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ये बॉम्बर जेट 200 टन तक भार लेकर उड़ान भरने में सक्षम है और 45 टन का पेलोड लेकर ये हाई-सबसोनिक रफ्तार से उड़ान भर सकता है। डिफेंस वेबसाइट 1945 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन का लक्ष्य इस दशक के अंत तक अपने वायुसेना के बेड़े में कई एच-20 विमानों को शामिल करना है और चीन की कोशिश अपनी वायुसेना की क्षमता को अमेरिकी वायुसेना की क्षमता तक ले जाना है, जिसके पास बी-2 फाइटर जेट है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि, चीन ने अमेरिका के बी-2 बॉम्बर की ही कॉपी कर एच-20 बनाया है।

अपनी वायुसेना को बदलना चाहता है चीन

अपनी वायुसेना को बदलना चाहता है चीन

मिलिट्री वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की कोशिश है, कि वो आने वाले सालों में अपनी वायुसेना को पूरी तरह से बदलकर अत्याधुनिक बना दे। फिलहाल चीन की वायुसेना के पास एच-6 बॉम्बर जेट मौजूद हैं, लेकिन एच-6 जेट सोवियत संघ के जमाने की टुपोलेव-16 बमवर्षक जहाज की कॉपी है, जो आज के जमाने के हिसाब से काफी पुरानी हो चुकी है। लिहाजा, चीन अपने वायुसेना के बेड़े में अत्याधुनिक विध्वंसक जहाजों की मौजूदगी चाहता है, जो ना सिर्फ स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैश हो, बल्कि उसकी मारक क्षमता भी हजारों किलोमीटर के रेंज में हो। एच-20 बॉम्बर जेट के साथ ही साथ चीन ने अपने एच-6 फाइटर जेट विमानों के इंजन को भी अपग्रेड करना शुरू कर दिया है।

भारत भी बना रहा स्टील्थ फाइटर जेट

भारत भी बना रहा स्टील्थ फाइटर जेट

चीन ने जहां स्टील्थ टेक्नोलॉजी के साथ बॉम्बर का निर्माण कर लिया है, वहीं भारत ने भी इसी साल से स्टील्थ टेक्नोलॉजी के साथ फाइटर जेट का निर्माण शुरू कर दिया है और इसके साथ भी भारत, रूस, अमेरिका और चीन के उस विशेष क्लब में शामिल हो गया है, जिसके पास स्टील्थ टेक्नोलॉजी है। सबसे खास बात ये है, कि भारत स्वदेश में ही 'इंडियाज एडवांस मीडिया कॉम्बेट एयरक्राफ्ट' (AMCA) का निर्माण कर रहा है। भारत के पड़ोस में दो-दो दुश्मन हैं और सामरिक लिहाज से पाकिस्तान कम नहीं है और चीन हमसे काफी ज्यादा ताकतवर है। लिहाजा, भारत को वक्त रहते अपने बाहुबल को मजबूत करने की जरूरत है और मोदी सरकार काफी तेजी से इस तरफ कदम भी बढ़ा रही है। भारतीय एयरोस्पेस कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने घोषणा की है, कि वह भारत के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) के लिए निर्माण प्रक्रिया शुरू कर रही है। (FILE PHOTO)

डीआरडीओ बना रहा है स्टील्थ फाइटर जेट

डीआरडीओ बना रहा है स्टील्थ फाइटर जेट

इसी साल मार्च के महीने में भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और HAL ने विमान निर्माण प्रक्रिया शुरू करते समय पहली शीट मेटल काटकर युद्धक विमान के निर्माण की शुरूआत कर दी है। AMCA का उद्देश्य भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना को 5.5 पीढ़ी के ट्विन-इंजन स्टील्थ फाइटर से लैस करना है, जो भारत के पुराने SEPECAT जगुआर और डसॉल्ट मिराज 2000 लड़ाकू विमानों की जगह लेगा, और इसके लाइसेंस-निर्मित सुखोई Su-30MKI जेट का पूरक है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जिस फाइटर जेट का निर्माण कर रहा है, उसे आकाश से जमीन पर हमला करने, दुश्मनों के वायु रक्षा क्षेत्र में मार करने, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध कार्यों के साथ साथ कई और उद्येश्यों की पूर्ती करने का लक्ष्य रखकर विमान का डिजाइन किया जा रहा है। इस युद्धक विमान को दुश्मनों की हवाई सुरक्षा के साथ साथ महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने और भीषण हमला करने लिए डिजाइन किया जा रहा है। (FILE PHOTO)

भारतीय फाइटर की क्या होगी क्षमता?

भारतीय फाइटर की क्या होगी क्षमता?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, डीआरडीओ जिस फाइटर जेट का निर्माण र रहा है, उसमें कई एडवांस टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है। जैसे फाइटर जेट में सुपरक्रूज टेक्नोलॉजी, डायवर्टर-कम सुपरसोनिक इंटेक, एडवांस एवियोनिक्स और आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इस फाइटर जेट को बेसलाइन स्टील्थ कॉन्फिगरेशन में 20 टन वजन रखने की क्षमता के साथ लैस करने की कल्पना की गई है, जिसमें अपने हथियारों के साथ साथ करीब 1.5 टन आयुध ले जाने की क्षमता होगी। हालांकि, भारतीय फाइटर जेट की आखिरी क्षमता क्या होगी, इसकी सटीक जानकारी के लिए हमें इंतजार करना होगा।

रडार के लिए डिटेक्ट करना होगा मुश्किल

रडार के लिए डिटेक्ट करना होगा मुश्किल

वहीं,मार्च महीने में एबीवी न्यूज की एक रिपोर्ट में प्रोजेक्ट मैनेजर रवि यादव ने कहा था कि, 'स्टेल्थ फाइटर जेट की बॉडी को खास मैटेरियल के साथ डिजाइन किया जाता है, जिसके चलते जब दुश्मन देश के रडार उसे डिटेक्ट करने की कोशिश करते हैं, तो इसकी बॉडी से तरंग टकराने के बाद वापस नहीं जाता है। यानि, इसकी बॉडी तरंगों को ऑब्जर्व कर लेता है, जिसके चलते स्टील्थ फाइटर जेट्स को रडारा डिटेक्ट नहीं कर पाते हैं।' इसके साथ ही इस विमान के जरिए पांच टन ईंधन और हथियार ले जाने की क्षमता है। वहीं, AMCA में थ्री-डायमेंशनल थ्रस्ट वेक्टरिंग और एक घरेलू रूप से निर्मित सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन एरे (AESA) रडार भी होगा।

फाइटर जेट में भारत बनाम चीन

फाइटर जेट में भारत बनाम चीन

वर्तमान में चीन J-20 और FC-31 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर्स के संचालन करने का दावा करता है, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हिमालय में उनके सीमा विवादों में किया जा सकता है। इसके विपरीत, भारत के पास अभी जो सबसे खतरनाक फाइटर जेट है, वो राफेल है, जो 4.5 पीढ़ी के फ्रांसीसी निर्मित राफेल और लाइसेंस-निर्मित 4+ पीढ़ी के रूसी Su-30MKI जेट हैं। और भारत जब 5.5 जनरेशन फाइटर जेट का निर्माण कर लेगा, तो फिर चीन को चुनौती देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। हालांकि, चीन के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की क्षमताएं अभी तक अज्ञात हैं, लेकिन उनके और भारत के मौजूदा लड़ाकू विमानों के बीच पीढ़ी का अंतर हिमालय पर हवाई संघर्ष में भारत को चिंता में डाल सकता है। (FILE PHOTO)

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