चिदंबरम बोले-पैदल चल रहे लाखों गरीबों को लेकर लिए पैकेज में कुछ नहीं
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी जानकारियां दीं। वित्तमंत्री ने कई क्षेत्रों के लिए बड़ी घोषणाएं की। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार के आर्थिक पैकेज के ऐलान पर निशाना साधा है। चिदंबरम ने पीएम मोदी के आर्थिक पैकेज को लेकर कहा कि वित्तमंत्री सीतारमण ने उन लाखों गरीब मजदूरों के लिए कुछ भी नहीं कहा जो भूखे हैं और पैदल ही अपने घरों की ओर जा रहे हैं।
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सरकार की पैकेज को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि, कल पीएम ने ठप्प अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करते हुए इसका आकार ₹20 लाख करोड़ बताया। जैसा कि शायद सरकार का इरादा किया था- हैडलाइन बनाना, लेकिन पूरा पेज खाली था। ये कहा गया था कि राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज का विवरण आज से अगले कुछ दिनों में वित्त मंत्री द्वारा घोषित किया जाएगा। इसलिए आज शाम 4 बजे मैंने बहुत उम्मीदों के साथ वित्तमंत्री को सुना। वित्तमंत्री ने हमें क्या बताया?- 45 लाख MSMEs को कोलैटरल मुक्त ऋण कार्यक्रम होगा, जिसमें ₹3 लाख करोड़ के क्रेडिट गारंटी फंड, ₹20,000 करोड़ के अधीनस्थ ऋण और ₹10,000 करोड़ के इक्विटी फंड सहित कुछ अन्य उपाय शामिल हैं।
चिदंबरम ने आगे कहा कि, वित्तमंत्री सीतारमण ने एमएसएमई के लिए कुछ घोषणाएं की हैं। इस पर मेरा ये कहना है कि बड़े एमएसएमई (करीब 45 लाख) के पक्ष में ज्यादा समर्थन उपायों की घोषणा की गई है। मुझे लगता है कि 6.3 करोड़ एमएसएमई को सूखा छोड़ दिया गया है। हालांकि हम सबऑर्डिनेट लोन (20,000 करोड़ रुपये) और इक्विटी कॉरपस फंड (10,000 करोड़ रुपये) का स्वागत करते हैं। लेकिन अब भी हमें नियम और शर्तों का इंतजार है।
पी चिदंबरम ने कहा कि, वित्तमंत्री ने आज जो कुछ कहा, उसमें लाखों गरीब, भूखे और तबाह प्रवासी श्रमिकों के लिए कुछ नहीं है और हजारों लोग अभी भी अपने गृह राज्यों में वापस जा रहे हैं। यह मेहनती लोगों के लिए एक क्रूर झटका है। आज विनाश के मुहाने पर खड़े निचले तबके के 13 करोड़ परिवारों को नकद हस्तांतरण के माध्यम से कुछ भी नहीं है। कल ही प्रो थॉमस पिकेट्टी ने गरीबों को नकद हस्तांतरण के लिए अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि, मैं लिक्विडिटी से संबंधित उपायों पर टिप्पणी करने से बचता हूं। इससे समर्थन के राजकोषीय उपायों की राशि नहीं मिलती और दुनिया में कहीं भी वे राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज में शामिल या गिने नहीं जाते हैं। बाकी के 16.4 लाख करोड़ रुपये कहां है? यह सरकार अपने ही अज्ञान और भय में कैद है। सरकार को अधिक खर्च करना होगा, लेकिन वह ऐसा करने को तैयार नहीं है।
वहीं कांग्रेसी नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, कल, आज और कल - कल ₹20,00,000 करोड़ का हेडलाइन पैकेज, आज ₹3,70,000 करोड़ का मात्र क़र्ज़ पैकेज, पर 'हेडलाइन से हेल्पलाइन पैकेज' कब? न ग़रीब के हाथ में एक फूटी कौड़ी, न किसान के खाते में एक रूपैया, न प्रवासी मज़दूर की घर वापसी या राशन,न दुकानदार/नौकरी पेशा को कुछ मिला। जुमले बनाने से पहले PM और FM जाने-
1. क़र्ज़ उपलब्ध करने को यानी लिक्विडिटी इन्फ़्यूज़न को राजकोषीय प्रोत्साहन या फ़िस्कल स्टिम्युलस नही कहा जा सकता।
2. लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय राजकोषीय प्रोत्साहन (फ़िस्कल स्टिम्युलस) नही हो सकते, यानी क़र्ज़ उपलब्ध करने से खपत नही बढ़ सकती।
3. 13 करोड़ ग़रीब परिवारों को ₹7,500 व राशन का निर्णय क्यों नही?
4. श्रमिक व मज़दूरों की घर वापसी का इंतज़ाम, राहत व राशन क्यों नही?
5. किसान के खाते में ₹10,000 क्यों नही?
6. 7 करोड़ दुकानदारों के लिए क्या?
7. मध्यम वर्ग से मुँह क्यों मोड़ा?












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