दुष्कर्म पीड़िता के 'मांगलिक' होने की नहीं होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक हैरान करने वाला आदेश जारी कर कहा था कि दुष्कर्म पीड़िता की कुंडली जांच कर यह पता लगाया जाए कि लड़की मांगलिक है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग को एक महिला की 'कुंडली' की जांच करने का निर्देश दिया गया था ताकि यह पता चल सके कि वह 'मांगलिक' है या नहीं।
शीर्ष अदालत ने लाइव लॉ न्यूज की एक रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया था, जब उच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते शादी के झूठे वादे के जरिए कथित दुष्कर्म के एक मामले में जमानत अर्जी पर आदेश पारित किया था। इस आदेश में लड़की की कुंडली जांच करने का आदेश दिया था ताकि पता लगाया जा सके कि लड़की क्या सच में मांगलिक है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को एक झटके में खारिज कर दिया।
ज्योतिष का इस मामले से कोई लेना देना नहीं
शनिवार को हुई विशेष सुनवाई में जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस पंकज मित्तल की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि ज्योतिष का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एचसी के आदेश को परेशान करने वाला करार दिया।
आरोपी ने पहले संबंध बनाए, फिर मांगलिक बताकर शादी से कर दिया मना
लखनऊ के चिनहट क्षेत्र की लड़की ने एक शख्स पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब में रहकर मजदूरी करने वाले गोविंद राय उर्फ मोनू ने उसे पहले शादी का झांसा दिया। फिर उसके साथ दुष्कर्म किए। बाद में जब पीड़िता ने उस पर शादी का दबाव बनाया तो उसकी कुंडली में मांगलिक दोष यानी मंगली बताते हुए शादी से इनकार कर दिया।












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