विपक्षी एकता को लेकर दुविधा में क्यों पड़ गया जम्मू-कश्मीर का अब्दुला परिवार?

पटना में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक को लेकर फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला में वैचारिक मतभेद उभर आया है। फारूक जहां इसका समर्थन कर रहे थे, वहीं उमर इसपर सवाल उठा रहे हैं।

विपक्षी एकता को लेकर जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस की टॉप लीडरशिप के बीच आपस में ही मतभेद उभर आए हैं। इसको लेकर फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला की सोच बिल्कुल बंटी हुई है। उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह भाजपा-विरोधी गठबंधन से बहुत दूर रहना चाहते हैं।

उमर अब्दुल्ला का नजरिया बुजुर्ग फारूक अब्दुल्ला से बिल्कुल उलट है। उन्होंने पिछले हफ्ते ही भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता का जमकर समर्थन किया था और वह विपक्षी दलों की कोशिशों पर सवाल उठाने वाले जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा से बेंगलुरू जाकर मिल भी आए थे।

Farooq Abdullah-Omar Abdullah on Opposition unity

उमर अब्दुल्ला विपक्षी एकता को लेकर उत्साहित नहीं
अगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 23 जून को पटना में आयोजित बैठक में भाजपा को विपक्षी दलों की ताकत दिखाना चाहते हैं, तो उनकी सोच को नेशनल कांफ्रेंस के इरादे से तगड़ा झटका लग सकता है। पार्टी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि उन्हें इस तरह के महागठबंधन से अपनी पार्टी या जम्मू-कश्मीर को कोई फायदा नहीं दिखता।

ये नेता आर्टिकल 370 पर कहां थे- उमर अब्दुल्ला
नेशनल कांफ्रेंस को भाजपा विरोधी विपक्षी दलों के साथ जोड़ने की संभावनाओं को लेकर उन्होंने 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म किए जाने का हवाला दिया और कहा, 'जब उन्हें हमारी जरूरत पड़ती है तो वह हमारा दरवाजा खटखटाते हैं.........लेकिन, ये नेता 2019 में कहां थे, जब हमसे एक बड़ी धोखेबाजी की गई? '

वो तब कहां थे जो आज रोना रो रहे हैं- नेशनल कांफ्रेंस नेता
उमर अब्दुल्ला बोले, 'सिर्फ दो या तीन पार्टियां- टीएमसी, डीएमके और लेफ्ट, जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ खड़ रहे।' उन्होंने आरोप लगाते हुए सवाल किया, 'वे लोग कहां थे, जो संविधान और लोकतंत्र बचाने का रोना रो रहे हैं, जब लोकतंत्र की हत्या कर दी गई थी? वे इसके खिलाफ नहीं बोले और सच तो यह है कि इसका समर्थन किया (संसद में)।' अब्दुल्ला ने पार्टी के सिर्फ जम्मू-कश्मीर की पांच सीटों पर फोकस करने की बात कही है।

फारूक अब्दुल्ला की राय उमर अब्दुल्ला से अलग
जूनियर अब्दुल्ला की बातें उनके पिता फारूक अब्दुला के बयानों से पूरी तरह से अलग है। पिछले हफ्ते जब फारूक जेडीएस के दिग्गज और पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा से मुलाकात के लिए अचानक बेंगलुरू पहुंचे थे तो 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए हो रही विपक्षी एकता की बैठक को लेकर काफी उत्साहित नजर आए थे।

'धीरे-धीरे विपक्ष के सारे लोग एकसाथ आएंगे'
देवगौड़ा से मुलाकात के बाद जब उनसे सवाल हुआ कि क्या 2024 के लिए भाजपा के खिलाफ क्षेत्रीय दलों को साथ आने की जरूरत है तो फारूक ने कहा, 'सवाल बीजेपी का नहीं, देश का सवाल है। क्या आप चाहते हैं कि धर्म के आधार पर राष्ट्र बंटे या आप चाहते हैं कि राष्ट्र एकजुट रहे।' जब उन्हें बताया कि उस मीटिंग के लिए जेडीएस को नहीं बुलाया गया है तो उन्होंने उम्मीद जताई कि धीरे-धीरे विपक्ष के सारे लोग एकसाथ आएंगे, 'चाहे वे कुछ भी हों।'

इसका फायदा क्या है?- एचडी देवगौड़ा
वैसे अब्दुल्ला से मुलाकात से पहले ही देवगौड़ा विपक्षी एकता की कोशिशों पर सवाल उठा चुके थे। उन्होंने पिछले हफ्ते कहा था, 'इस देश की राजनीति का मैं विस्तार से विश्लेषण कर सकता हूं, इसका फायदा क्या है? मुझे एक पार्टी दिखाइए जो सीधे या परोक्ष रूप से बीजेपी से नहीं जुड़ी हुई हो। पूरे देश में मुझे एक पार्टी दिखाइए, तब मैं उत्तर दूंगा।'

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