पेगासस मुद्दे को तूल दिए जाने पर विपक्ष में ही दो मत, हेमंत सोरेन ने उठाए सवाल
नई दिल्ली, 22 अगस्त। विपक्ष के नेताओं की शुक्रवार को बैठक हुई, जिसमे 19 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। जिसमे झारझंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेगासस मुद्दे को तूल दिए जाने पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो मुद्दे आम जनता से जुड़े हैं और जिसका राजनीतिक असर होगा उनपर ध्यान देने की अहम चुनौती हमारे सामने हैं। बता दें कि तीन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव है, ऐसे में कांग्रेस और अन्य दल के केई नेताओं को लगता है कि इस पेगासस जैसे मुद्दों पर इतना ज्यादा आक्रामक होना विपक्ष की मदद नहीं करेगा, राफेल की तरह ही विपक्ष के लिए दूसरा मुद्दा बन सकता है जिसका लोगों पर असर नहीं हुआ।

सूत्रों के अनुसार हेमंत सोरेन ने कहा कि पेगासस जरूरी मुद्दा है, लेकिन यह आम आदमी को कैसे प्रभावित करता है,नए कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को कैसे प्रभावित करता है। वहीं सीताराम येचुरी ने इसके विरोध में तर्क देते हुए कहा कि विपक्ष को जासूसी मामले को लोगों के बीच एक वृहद तरीके से रखने की जरूरत है, लोगों को बताने की जरूरत है कि कैसे संस्थाओं पर सरकार नियंत्रण कर रही है, वह जासूसी करके देश के लोकतंत्र को खतरे में डाल रही है। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि पेगासस स्पाइवेयर का भाजपा सरकार ने इस्तेमाल करके अधिनायकवादी राज्य बना दिया है।
हालांकि बैठ के दौरान नेताओं के एक वर्ग को यह जरूर लगता है कि पेगासस के मुद्दे को आगे ले जाना चुनौती होगा। पेगासस जासूसी के जमीनी असर का पता अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में जरूर पता चलेगा। कांग्रेस के भीतर के भी कुछ नेताओं को लगता है कि पेगासस मामले को मानसून सत्र में इस तरह से उठाना गलत रणनीति थी। पंजाब, हरियाणा के सदस्य इस बात से खुश नहीं थे कि किसानों के मुद्दे को पीछे करके पेगासस मुद्दे को वरीयता दी गई।
एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि चुनाव एक मुद्दे पर नहीं लड़े जा सकते हैं। यूपी में योगी सरकार के गलत शासन पर जनता अपना वोट देगी, कोरोना की दूसरी लहर में जिस तरह से वह लापता हो गए हैं, वह अहम मुद्दा है। पेगासस जासूसी मामला गंभीर मुद्दा है, लेकिन और भी मुद्दे हैं जिसको लेकर सरकार से सवाल किया जाना चाहिए। इस वक्त देश बड़े आर्थिक उथालपुथल से गुजर रहा है, जिसकी वजह भाजपा सरकार है। वहीं सपा और बसपा दोनों का मानना है कि पेगासस मुद्दा ग्रामीण यूपी तक पहुंचान काफी मुश्किल है।












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