ओडिशा में आयोजित हो रहे वैश्विक उड़िया भाषा सम्मेलन को विपक्ष ने बताया प्रलोभन, भाषाविद भी हुए नाराज
ओडिशा की सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजेडी) सरकार भुवनेश्वर में 3 फरवरी से तीन दिवसीय वैश्विक उड़िया भाषा सम्मेलन आयोजित कर रही है। जिसके दौरान सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है। ओडिशा में हो रहे इस सम्मेलन पर लगभग 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है।

बता दें 2024 के लोकसभा चुनाव और ओडिशा चुनाव से पहले ये वैश्विक सम्मेलन आयोजित मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सरकार कर रही है, इसके साथ सत्तारूढ़ बीजद और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अलोचना कर रहे हैं। विपक्ष ने इस सम्मेलन को प्रलोभन बताया है। वहीं इस सम्मेलन के देरी से किए जाने पर भाषाविद नाराज हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि बीजेडी 2024 के आम और विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए ओडिशा में जनहित के भावनात्मक मुद्दों का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मठ-मंदिरों के जीर्णोद्धार और प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद सत्तारूढ़ दल उड़िया भाषा का इस्तेमाल कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
कई राजनीतिक विश्लेषकों ने पटनायक सरकार को घेरते हुए कहा "भगवान का सहारा लेने के बाद सत्तारूढ़ दल इस भाषा सम्मेलन से राजनीतिक लाभ लेने की फिराक में है।
सम्मेलन के दौरान स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों के अलावा उनके अभिभावकों को भी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
इस सम्मेलन के तहत शहरों के अलावा गांवों में पंचायत स्तर विभिन्न कार्यक्रम किए जाएंगे। पंचायत और जिला स्तरीय कार्यक्रमों के लिए 20,000 रुपये 50,000 रुपये आवंटित किए गए हैं। सम्मेलन में भक लस्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को एसएचजी ब्लॉक फेडरेशन के जरिए 20,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे।












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