INDIA: विपक्षी गठबंधन को मिला BRS का समर्थन, फिर भी बीजेपी खुश क्यों होगी? जानिए

तेलंगाना में सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति विपक्षी दलों की संयुक्त बैठक में पटना और बेंगलुरु कहीं नहीं शामिल हुई थी। लेकिन, अब बीआरएस ने ऐलान किया है कि इसका मतलब यह हरगिज नहीं है कि वह बीजेपी के पक्ष में और विपक्षी गठबंधन के विचार के खिलाफ है।

बीआरएस के राज्यसभा सांसद और सदन में पार्टी के नेता के केशव राव ने बीजेपी के विरोध में विपक्षी एकता के साथ जाने की बात कहकर I.N.D.I.A. का मनोबल बढ़ा दिया है। क्योंकि, तथ्य यही है कि इस तरह की विपक्षी एकजुटता की पहल भी बीआरएस चीफ और तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने ही की थी।

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हम INDIA के विचार के विरोधी नहीं हैं- बीआरएस
के केशव राव ने कहा है कि गठबंधन बनाने के लिए उन्होंने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को बधाई भी दी है। उन्होंने ईटी को बताया है, 'बेंगलुरु बैठक में पार्टी नहीं गई, इसका मतलब ये नहीं है कि हम बीजेपी के पक्ष में हैं। हम INDIA के विचार के विरोधी नहीं हैं। यह विचार विविधता में एकता का है।'

मानसूत्र सत्र में विपक्षी दलों के साथ दिखाएगी एकजुटता
उन्होंने ये भी कहा है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान उनकी पार्टी खास विषयों पर विपक्षी दलों के साथ समन्वय करती रहेगी। उनके मुताबिक गुरुवार को पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक का बायकॉट किया। राव ने कहा, 'दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे पर हमारी पार्टी ने पहले ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया है।'

दिल्ली अध्यादेश पर बीजेपी के खिलाफ मुखर हुई बीआरएस
भाजपा के मुकाबले विपक्षी दलों के साथ निकटता बढ़ने की ओर इशारा करते हुए बीआरएस नेता ने दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे पर आगे कहा, 'हमारी पार्टी बीआरएस, एएपी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सभी को लगता है कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है और सरकार को अध्यादेश को खत्म होने देना चाहिए और अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए। '

'इंडिया के आइडिया के खिलाफ नहीं'
उन्होंने इन अटकलों को खारिज किया कि उनकी पार्टी अलग रहना चाहती है। वे बोले, 'मैं अनीश्वरवादी हूं, लेकिन इसका मतलब नहीं है कि मैं एक नास्तिक हूं। मैं इंडिया के आइडिया के खिलाफ नहीं हूं। मेरा अपना नजरिया है, मैं उस समूह के साथ रहूंगा, जो लोगों के साथ है।' दरअसल, तेलंगाना के सीएम केसीआर ने ही सबसे पहले विपक्षी एकता की मुहिम छेड़ी थी। वे बिहार के सीएम नीतीश कुमार, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव से भी इसको लेकर मुलाकात कर चुके हैं।

विपक्षी एकजुटता की शुरू की थी मुहिम
लेकिन, वे कांग्रेस के साथ एक मंच पर आने से कतरा रहे थे, क्योंकि तेलंगाना में पार्टी उसे ही अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानती है, जहां इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बाद में विपक्ष को एकजुट करने की इनकी मुहिम को नीतीश ने लपक लिया और वह पटना में करीब 15 विपक्षी दलों को जुटाने में सफल हुए, लेकिन कांग्रेस की वजह से बीआरएस ने उस बैठक से कन्नी काट ली थी।

गुरुवार एक तरफ दिल्ली में बीआरएस खुद को विपक्षी गठबंधन के करीब लाने की कोशिश में दिख रही थी, वहीं हैदराबाद में बीजेपी ने उसकी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। केंद्रीय मंत्री और पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सरकारी हाउसिंग साइट पर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन सबको रोक दिया।

बीआरएस सरकार के खिलाफ युद्ध शुरू- बीजेपी
इसपर बीजेपी नेताओं ने सड़क पर ही धरना दे दिया। खुद को रोकने और कुछ नेताओं को घर में 'हाउस अरेस्ट' किए जाने का आरोप लगाते हुए रेड्डी ने ऐलान किया कि बीआरएस सरकार के खिलाफ 'युद्ध शुरू हो गया है।'

इस वजह से खुश होगी बीजेपी
दरअसल, तेलंगाना में विपक्षी कांग्रेस भाजपा को भारत राष्ट्र समिति की 'बी' टीम होने का आरोप लगाती रही है। लेकिन, जिस तरह से विपक्ष के नए इंडिया गठबंधन बनने के बाद खासकर कांग्रेस के प्रति बीआरएस का रवैया नरम पड़ा है, उससे बीजेपी को खुद के सामने प्रमुख विपक्ष की भूमिका निभाने का मौका नजर आ रहा है। कर्नाटक में सत्ता गंवा चुकी पार्टी को तेलंगाना में नया अवसर दिख रहा है।

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