Cyclone Ditwah: ऑपरेशन सागर बंधु सुपरहिट! श्रीलंका से आखिरी जत्था भी सुरक्षित लौटा, कितने लोगों की हुई वापसी
Cyclone Ditwah Sri Lanka: श्रीलंका में आए चक्रवात 'डिटवा' के बाद गंभीर बाढ़ और अव्यवस्था के बीच भारत ने 'ऑपरेशन सागर बंधु' शुरू कर फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी तथा राहत पहुंचाने का बड़ा मानवीय अभियान चलाया। भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ और उच्चायोग के संयुक्त समन्वय से कोलंबो के बंदरानाइक अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर फंसे भारतीयों को चरणबद्ध तरीके से वापस लाया गया।
अंतिम बैच के 104 यात्री तिरुवनंतपुरम पहुंचे। राहत सामग्री, चिकित्सकीय सहायता और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों की तैनाती से भारत ने पड़ोसी देश के प्रति अपना दृढ़ समर्थन फिर सिद्ध किया।

Operation Sagar Bandhu: अंतिम बैच के यात्रियों की सुरक्षित वापसी
ऑपरेशन सागर बंधु के तहत कोलंबो हवाईअड्डे पर फंसे भारतीय नागरिकों की अंतिम खेप भारत पहुंच गई। 104 यात्री भारतीय वायुसेना के विमान से तिरुवनंतपुरम पहुंचे। प्रस्थान के समय यात्रियों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए, जिससे राहत और उत्साह का माहौल दिखा। भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने स्वयं यात्रियों को विदाई दी। यह अभियान भारत की तेज़, संगठित और संवेदनशील प्रतिक्रिया का प्रमाण है, जिसने आपदा के बीच नागरिकों को सुरक्षित घर पहुंचाया।
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रविवार को भी 400 लोगों को निकाला गया
रविवार को लगभग 400 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से निकाला गया, जिससे ऑपरेशन सागर बंधु की गति और प्रभावशीलता स्पष्ट दिखी। भारतीय वायुसेना के IL-76 और C-130J विमानों ने लगातार उड़ानें भरकर यात्रियों को कोलंबो से तिरुवनंतपुरम और दिल्ली पहुंचाया। उच्चायोग की सहायता टीमों ने हवाईअड्डे पर यात्रियों को भोजन, चिकित्सा और दस्तावेज़ी मदद प्रदान की। इस तेज़ और समन्वित प्रयास ने फँसे हुए लोगों को बड़ी राहत दी और अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राहत सामग्री और चिकित्सा दल की तैनाती
भारत ने केवल नागरिकों को निकालने तक ही सीमित न रहकर श्रीलंका को व्यापक राहत भी भेजी। भारतीय वायुसेना के C-130J विमान ने लगभग 10 टन आपदा राहत सामग्री, BHISHM क्यूब्स और एक विशेष चिकित्सा दल को कोलंबो पहुंचाया। ये दल स्थानीय एजेंसियों को प्रशिक्षण देते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सहायता प्रदान कर रहे हैं। इससे न केवल तत्काल ज़रूरतें पूरी हुईं, बल्कि आपदा प्रबंधन क्षमता को भी मज़बूती मिली। यह प्रयास भारत की पड़ोसी-प्रथम नीति का प्रतीक है।
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वायुसेना और एनडीआरएफ की महत्वपूर्ण भूमिका
ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने IL-76, C-17 और C-130J जैसे भारी विमान तैनात किए। इनसे 21 टन राहत सामग्री, 80 से अधिक एनडीआरएफ कर्मी और 8 टन उपकरणों को श्रीलंका भेजा गया। एनडीआरएफ टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर बाढ़ राहत और बचाव कार्यों में लगीं। घरेलू संसाधनों को तेजी से सक्रिय करते हुए भारत ने दिखाया कि आपातकाल में वह बड़े पैमाने पर मानवीय मदद देने की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों रखता है।
भारतीय उच्चायोग की सहायता और हेल्पडेस्क
श्रीलंका स्थित भारतीय उच्चायोग लगातार हवाईअड्डे पर मौजूद फंसे भारतीयों की सहायता कर रहा है। वाणिज्यिक उड़ानों और वायुसेना विमानों के माध्यम से यात्रियों की चरणबद्ध निकासी जारी है। उच्चायोग ने आपातकालीन हेल्पडेस्क नंबर जारी किया है, जिससे कोई भी फँसा यात्री संपर्क कर सकता है। एयरलाइंस काउंटरों को सक्रिय कर यात्रा प्रबंध में भी मदद दी जा रही है। इस समन्वित सहायता से बड़ी संख्या में भारतीय सुरक्षित और समय पर स्वदेश लौट पाए हैं।
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