वनइंडिया के पाठकों ने सराहा किन्नरों के हित में हुआ फैसला

पत्रकारिता की छात्रा दीपाली पोरवाल ने फैंसले को जनहित में बताते हुए इसे न्यायपालिका की जीत बताया। वहीं एक निजी कंपनी में कार्यरत दत्तू ने भी फैंसले को किन्नरों के अधिकारों की जीत बताया। पूरे सर्वे में हमने लोगों से राय भी मांगी थी, जिसमें सभी ने एकस्वर में इस फैंसले को समाजहित में बताया। वहीं बाकी न्यूनतम पाठकों की राय, इस सम्बंध में 'पता नहीं' रही।
बेहद कम पाठकों ने फैंसले पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इससे साफ जाहिर है समाज का हर तबका किन्नरों के हित की बात करता है। ऐसे ही सर्वे में मिली प्रतिक्रियाओं के जरिए हम पाठकों की राय जानते हैा। आप की भागीदारी, हमारी शैली का हिस्सा है।
पत्रकारिता हो या राजनीति, जनता की सर्वाधिक भागीदार की सवर्थ जरूरत रहती है। किन्नरों को सुप्रीम कोर्ट ने ना सिर्फ अलग लिंग का दर्जा दिया, बल्कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा व उत्थान की भी पैरवी की है।












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