कांग्रेस के हाथ से जा रहा है एक और राजनीति का धुरंधर

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बताया जा रहा है कि वह लोकसभा चुनाव में अपने बेटे नीलेश की हार से काफी निराश हैं। राज्य में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से ही वह कैबिनेट की बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे। राणे के बेटे रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग लोकसभा सीट से शिवसेना उम्मीदवार से हार गए थे. इससे पहले भी राणे कई बार प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर नाखुशी जता चुके हैं।
राणे ने राज्य में कांग्रेस के उम्मीदवारों की हार के लिए सहयोगी एनसीपी पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने चुनाव नतीजों वाले दिन ही कैबिनेट से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी लेकिन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने उसे खारिज कर दिया था।
हार के बाद नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर राणे ने कहा था कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं से इस संबंध में बात करेंगे और अपना रुख बताएंगे. सूत्रों के मुताबिक, नाराज चल रहे राणे दो दिन में अपने कदम का ऐलान कर सकते हैं।
उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह तीन साल से चुप थे लेकिन अब नहीं रहेंगे. 2005 में शिवसेना छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए राणे को विलासराव देशमुख की सरकार में मंत्री बनाया गया था। गौरतलब है कि बीते दिन राहुल गांधी पर निशाना साधने वाले एक नेता की पार्टी ने छुट्टी कर दी थी।












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