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जेंडर चेंज कराना कितना मुश्किल और खर्चीला होता है? जानें फायदे और नुकसान

जेंडर डायसोफोरिया... ये एक ऐसा डिसऑर्डर है, जिसमें लोग खुद को अपोजिट सेक्स या फिर जेंडर में कंफर्टेबल पाते हैं। मान लीजिये कोई लड़की है तो उसे लड़के की तरह उठना-बैठना, बात करना पसंद होता है। वहीं अगर कोई लड़का है तो उसे लड़कियों की तरह हरकतें करना ज्यादा पसंद होता है। इस स्थिति को ही जेंडर डायसोफोरिया कहा जाता है। जिन लोगों में ये डिसऑर्डर होता है, वे ही लिंग परिवर्तन करवाने के बारे में सोचते हैं।

मगर क्या ये जेंडर चेंड करवाना आसान है? इसमें खर्चा कितना कितना आता है? इसके नफा नुकसान क्या हैं? जेंडर चेंज करवाना चाहिए भी या नहीं? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हैं, जो आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिये देने जा रहे हैं।

gender change

लिंग परिवर्तन.. ये एक ऐसा शब्द है, जो आजकल सुनने में काफी आ रहा है। वक्त बदल रहा है और कोई भी किसी डिसऑर्डर के साथ नहीं जीना चाहता। ऐसे में अगर किसी को लगता है कि उसमें अपोजिट जेंडर जैसे कुछ डिसऑर्डर हैं तो वे लिंग परिवर्तन के बारे में सोचते हैं।

अकसर जेंडर डायसफोरिया के लक्षण 12 से 16 साल में ही नजर आने लगते हैं। मगर समाज के डर से कई माता-पिता बच्चों के शरीर में हो रहे इन बदलावों को बताने से डरते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि सर्जरी करवाना काफी मुश्किल होता है।

सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी या फिर जेंडर चेंज करना एक चुनौतीभरा काम हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले तो खुद को मानसिक तौर पर तैयार करना मुश्किल काम है। और दूसरी तरफ ये सर्जरी भी हर कहीं उपलब्ध नहीं है। बताते चलें कि इस प्रक्रिया में कुल 18 चरण होते हैं। सर्जरी करने से पहले सर्जन को भी मनोचिकित्सक का अप्रूवल लेना होता है कि क्या मरीज वाकई जेंडर डायसफोरिया से पीड़ित है भी या नहीं।

इस प्रक्रिया में दो से ढाई लाख रुपये तक का खर्चा आता है। इसके लिए सबसे पहले तो एक टेस्ट किया जाता है, जो दिमाग का टेस्ट होता है। फिर इसके बाद हार्मोन थेरेपी शुरू हो जाती है। डॉक्टर्स मरीज को इंजेक्शन के करीब तीन से चार डोज देते हैं, जिसके बॉडी में हार्मोल बदलाव होने लगते हैं, जिसके बाद ही ये प्रोसीजर शुरू होता है।

इसके बाद पुरुष या फिर महिला के चेहरे और प्राइवेट पार्ट के शेप को बदला जाता है। महिला से पुरुष बनने वाले शख्स में ब्रेस्ट को हटाया जाता है और पुरुषों के प्राइवेट पार्ट को डेवलब किया जाता है। पुरुष से महिला बनने वाले शख्स के शरीर से लिए मांस से ही महिला वाले अंग बनाए जाते हैं।

ब्रेस्ट की बात करें तो इसके लिए अलग से समय निकालना पड़ता है। डॉक्टर्स बताते हैं कि 21 साल से ऊपर के शख्स में ही ये सर्जरी करवाई जाती है।

अब अगर जेंडर चेंज करवाने की सर्जरी के बारे में बात करें तो इसे करवाने के बाद लोग खुद को पाते हैं। अकसर जिन लोगों में डिसऑर्डर होता है, वो समाज के डर से अपने हावभाव बदलने की कोशिश करते हैं। मगर ये सर्जरी उन्हें एक रूप देता है एक आकार देता है, जिससे वे सिर उठाकर समाज में चल सकें।

इस प्रक्रिया के नुकसान की बात करें तो आमतौर पर हर सर्जरी की तरह ये दर्दनाक होती है। इसके लिए पहले तो मानसिक रूप से आपको खुद को तैयार करना होता है। वहीं कई बार आप अपने बदले रूप को स्वीकार नहीं कर पाते मगर तब कुछ भी पहले जैसा नहीं हो सकता।

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