ओडिशा ट्रेन हादसे के बाद चर्चा में है प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच', जो रोक सकता था इस एक्सीडेंट को
odisha train accident , ओडिशा के बालासोर में बहनागा बाजार स्टेशन के पास 3 ट्रेनों की इस भीषण टक्कर में 260 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 900 से ज्यादा घायल हो गए हैं।

ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार को हुए रेल हादसे को पिछले दो दशकों में हुआ सबसे बड़ा रेल हदसा बताया जा रहा है। इसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 900 से अधिक घायल हुए है। शुरुआती जानकारी में मुताबिक हादसा मानवीय गलती की वजह से हुआ है।
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक दल और लोग सरकार के ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली 'कवच' को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें के इस प्रणाली की टेस्टिंग के दौरान ट्रेन में मौजूद दिख रहे हैं।
कांग्रेस नेता बी श्रीनिवास ने पूछा कि, जब एक Train Derail होकर दूसरे Railway Track पर आ गयी थी, तब 'Kavach' कहां था? 300 के आसपास मौतें, करीब 1000 लोग घायल. इन दर्दनाक मौतों के लिए कोई तो जिम्मेदार होगा? कवच को रेलवे ने जीरो एक्सीडेंट टार्गेट हासिल करने के लिए लॉन्च किया था।

क्या है रेलवे का Kavach प्रोटेक्शन सिस्टम?
कवच एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे भारतीय रेलवे ने रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन के जरिए विकसित किया है। इस तकनीक का नाम ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम (टीसीएएस) है। यह एक स्वचालित सुरक्षा प्रणाली है।
कैसे काम करता है कवच
अगर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने सामने हों तो कवच टेक्नोलॉजी ट्रेन की स्पीड कम कर इंजन में ब्रेक लगाती है। इससे दोनों ट्रेनें आपस में टकराने से बच जाएंगी। कवच को साल 2020 में नेशनल ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के तौर पर अपनाया गया था। कवच एक SIL-4 प्रमाणित टेक्नोलॉजी है।
ये सिस्टम कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस का सेट है। इसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइसेस को ट्रेन, ट्रैक, रेलवे सिग्नल सिस्टम और हर स्टेशन पर एक किलोमीटर की दूरी पर इंस्टॉल किया जाता है। ये सिस्टम दूसरे कंपोनेंट्स से अल्ट्रा हाई रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए कम्युनिकेट करता है।

जैसे ही कोई लोको पायलट किसी सिग्नल को जंप करता है, तो कवच एक्टिव हो जाता है। इसके बाद सिस्टम लोको पायलट को अलर्ट करता है और फिर ट्रेन के ब्रेक्स को अपने कंट्रोल लेता है। सिस्टम जैसे ही पता चलता है कि ट्रैक पर दूसरी ट्रेन आ रही है, दूसरी ट्रेन को अलर्ट करने के साथ ही अपनी ट्रेन को भी रोकना शुरू कर देता है।
किन परिस्थितियों में काम करता है कवच
लोकोमोटिव पायलट के कार्य करने में विफल होने की स्थिति में कवच स्वत: ब्रेक लगा सकता है।
कवच कोहरे की स्थिति में बेहतर दृश्यता उपलब्ध करता है।
मूवमेंट अथॉरिटी को लगातार अपडेट करता है।
लेवल क्रॉसिंग पर स्वचालित सीटी बजाने में सक्षम है।
सीधे लोको-टू-लोको संचार के माध्यम से टकराव से बचाव और आपातकालीन स्थितियों में ट्रेनों को नियंत्रित करने के लिए एक एसओएस सुविधा भी यह मुहैया कराता है।
अगर कोई ट्रेन सिग्नल जंप करती है, तो 5 किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी ट्रेनों की मूवमेंट रुक जाएगी।

क्या कवच ओडिशा ट्रेन दुर्घटना को रोक सकता था?
बालासोर हादसे के बाद लोग पूछ रहे है कि, कवच तकनीक ने ये हादसा क्यों नहीं रोका? तो इसका सीधा जवाब है कि इस ट्रेक पर ये तकनीक मौजूद नहीं थी। इस पर रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा कि इस रूट पर कवच सिस्टम नहीं लगा था। बता दें कि पूरे देश के रेल नेटवर्क पर कवच को अभी इंस्टॉल नहीं किया जा सका है।
बजट 2022 के दौरान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2022-2023 में कवच प्रौद्योगिकी को देश के 2,000 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क पर स्थापित करने की घोषणा की थी।












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