अतिरिक्त खनन करने वालों से ओडिशा सरकार वसूलेगी 2965 करोड़
ओडिशा में खनन के लिए लीज पर दी गई खदान मालिकों से 2965 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूल किया जाना बाकी है। प्रदेश सरकार की ओर से सोमवार को विधानसभा में इस बात की जानकारी दी गई है।
दरअसल इन खदानों में अतिरिक्त मात्रा में लौह और मैग्नीज अयस्क जुटाया गया था, जोकि पट्टे के समझौते के खिलाफ है। इस वजह से इन खदानों से 2965 करोड़ रुपए का जुर्माना इन खदानों से वसूल किया जाना है।

कुल 26 ऐसे पट्टाधारक हैं जिनपर यह जुर्माना लगाया गया है। इन डिफॉल्टर्स पर सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाया था। इसमे से सिर्फ 18 डिफॉल्टर्स ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पांच साल और नौ महीने तक एक भी पैसे का भुगतान नहीं किया है।
जस्टिस एमबी शाह आयोग की सिफारिश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2 अगस्त 2017 को अतिरिक्त खनन के चलते लीज होल्डर्स पर 3275.57 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। खदान मालिकों को इस बाबत नोटिस जारी किया गया था।
डिफॉल्टर्स में बीपीएमई लिमिटेड पर सबसे ज्यादा बकाया है। इसपर 812.51 करोड़ रुपए का जुर्माना बकाया है। इसके बाद मिडईस्ट इंटीग्रेटेड स्टील लिमिटेड पर 657.52 करोड़ रुपए का बकाया है।
बीके मोहंती पर 384.74 करोड़, जीएसआई लिमिटेड पर 267, 12 करोड़ रुपए का बकाया, एस प्रधान पर 123 करोड़ रुपए का बकाया और बीसी देव पर 116.84 करोड़ रुपए का बकाया है।
इस्पात और खनन मंत्री प्रफुल्ल कुमार मलिक ने विधानसभा में कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूज के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कोर्ट ने 133 खनन पट्टा धारकों को अतिरिक्त खनन के चलते 31 दिसंबर 2017 में 18526.47 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था।
जिसमे से 107 लीज धारकों ने समय सीमा के भीतर 15561.19 करोड़ रुपए जमा कराए हैं। जिन लोगों ने जुर्माना नहीं दिया है उनके खिलाफ केस दर्ज कराए गए हैं।












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