DRM Daughter Shoe Bareilly: एक महीने तक लाडली के जूतों की तलाश करती रहीं तीन एजेंसियां, डॉक्टर के पास मिला
सिंघम फिल्म का डायलॉग- 'अगर पुलिस चाहे तो कोई मंदिर के बाहर से चप्पल भी नहीं चुरा सकता' बेहद मशहूर है। पुलिस ने इसे साबित भी कर दिखाया। 3 राज्यों में तलाश के बाद 20 साल की युवती के 'गायब जूते' एक महीने बाद बरामद हुए हैं।

DRM Daughter Shoe Bareilly: 57 साल पहले राजा मेहदी अली खान की कलम से 'झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में' बोल वाले गाने की रचना हुई। 1966 की फिल्म 'मेरा साया' में अभिनेत्री साधना पर फिल्माया गाया गाना आशा भोसले की सदाबहार आवाज में रिकॉर्ड किया गया। आप सोच रहे होंगे कि इतने लंबे अरसे बाद इस प्रसंग का जिक्र क्यों? दरअसल, ये ऐसी कहानी की भूमिका है जिसमें बरेली कनेक्शन है। हालांकि, इतने साल बाद किसी के झुमके नहीं, जूते गायब हुए हैं। भारतीय रेलवे में सफर के दौरान बेटी के 'जूते गायब' होने पर एक महिला ने अधिकारियों के छक्के छुड़ा दिए। जानिए पूरी कहानी
किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि झुमका गिरने के बोल वाला गाना 'जूते गायब' होने से चर्चा में आएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की एक दिलचस्प रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी की बेटी के 'जूते गायब' होने की बात सामने आई। इसके बाद तीन प्रमुख एजेंसियों के अधिकारी तलाश में जुट गए। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने एक महीने से अधिक समय तक उत्तर प्रदेश और ओडिशा में 'जूते गायब' होने के मामले की जांच की।
मामले से जुड़े जांच अधिकारी मनोज त्यागी ने टीओआई को बताया, "रेलवे पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान एक महिला डॉक्टर ने बताया कि जब ट्रेन 4 जनवरी को सुबह 3 बजे के करीब बरेली स्टेशन पहुंची, तो वह अचानक जाग गईं। 'गलत जूते की जोड़ी' पहनकर ट्रेन से उतर गईं, क्योंकि जूते एक ही आकार के थे। इस डॉक्टर को पता भी नहीं होगा कि जूते की तलाश तीन एजेंसी और दो राज्यों के अधिकारियों को करनी होगी। एक महीने बाद मामले में रोचक बात सामने आई है।
जांच अधिकारी के मुताबिक उन्होंने दिल्ली की महिला डॉक्टर के पास से रेलवे अधिकारी के बेटी के जूते बरामद करने के बाद इसे वापस करने का फैसला लिया है। जूते शिकायतकर्ता को वापस भेजे जाएंगे। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक मंडल रेल प्रबंधक (DRM) (ईस्ट कोस्ट रेलवे ज़ोन), विनीत सिंह ने संबलपुर में अपनी 20 वर्षीय बेटी की ओर से चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। ओडिशा में 5 जनवरी को लखनऊ मेल के एसी प्रथम श्रेणी कोच से 10 हजार रुपये मूल्य के जूते चोरी होने का दावा किया गया। प्राथमिकी में डीआरएम की बेटी ने कहा, ''बरेली स्टेशन पर उतरी महिला पर संदेह है। चोरी का संदेह इसलिए क्योंकि उसने अपने पुराने गुलाबी रंग के बिना फीते वाले जूते केबिन में छोड़ दिए थे। शायद वह नए जूते ले गई।"
शिकायत को 24 जनवरी को बरेली जीआरपी को ट्रांसफर किया गया। तीन एजेंसियों की व्यापक जांच के बाद, एक ही कोच में यात्रा कर रही महिला का पता लगाने में कामयाबी मिली। जांच अधिकारी त्यागी ने बताया "उसी केबिन के सह-यात्री के खिलाफ आईपीसी की धारा 380 (आवास गृह में चोरी आदि) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरक्षण चार्ट को स्कैन करने के बाद, हमें संदिग्ध का संपर्क विवरण मिला और उसे बरेली बुलाया गया।" एसएचओ-जीआरपी (बरेली जंक्शन), अजीत प्रताप सिंह ने कहा, "संदिग्ध आरोपी जूते की जोड़ी गलती से पहन ली, क्योंकि वह ट्रेन में अपने जूते भी छोड़ गई थी। जांच के बाद पाया गया कि रेलवे की बोगी से कोई चोरी नहीं हुई।" अब जीआरपी इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करेगी।
रिपोर्ट में कहा गया कि 'जूते गायब' होने पर चोरी का संदेह हुआ, लेकिन अंत में यह निष्कर्ष निकला कि ओडिशा के वरिष्ठ रेलवे अधिकारी की 20 वर्षीय बेटी के एक जोड़ी जूते वास्तव में चोरी हुए ही नहीं। एक सह-यात्री ने गलती से उसके जूते पहन लिए। महिला की पहचान दिल्ली में प्रैक्टिस कर रही एक 34 वर्षीय महिला डॉक्टर के रूप में हुई। रेलवे पुलिस ने कहा, जूता चोरी का कोई सबूत नहीं है और इसलिए उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया जाएगा।"












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