पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खोलने का मुद्दा गर्माया, जानिए तीन को क्यों कर दिया गया है बंद?
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खोलने का मुद्दा अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। सोमवार को पुरी में प्रदेश कांग्रेस ने श्रद्धालुओं के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार तत्काल खोलने की मांग को लेकर एक विरोध-रैली आयोजित की और सरकार को 29 अक्टूबर तक उनकी मांग मान लेने का अल्टीमेटम थमा दिया।
कांग्रेस के कार्यकर्ता इस दौरान पार्टी के झंडे के साथ झांझ और मृदंग बजाते हुए पुरी के ग्रैंड रोड स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA)के दफ्तर तक पहुंच गए। इस विरोध रैली की अगुवाई कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शरत पटनायक कर रहे थे। इस रैली में कांग्रेस के कई बड़े नेता भी शामिल हुए।

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29 अक्टूबर तक जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खोलने की मांग
पार्टी नेताओं ने अपनी मांगों वाला एक ज्ञापन एसजेटीए के मुख्य प्रशासनक रंजन दास को सौंपा, जो ओडिशा के राज्यपाल को संबोधित कर लिखा गया था। पटनायक ने कहा कि उड़िया के पवित्र मास कार्तिक की शुरुआत से पहले श्रद्धालुओं के लिए पुरी मंदिर के सभी चारों द्वार फिर से खोल दिए जाने चाहिए। कार्तिक का पवित्र महीना 29 अक्टूबर से शुरू हो रहा है।
मंदिर जाने के लिए कतार में खड़े एक श्रद्धालु की मौत का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया, 'पुरी भारत के चार धामों में से एक है और विश्व भर से लाखों श्रद्धालु यहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन, मंदिर में जाते समय उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाल ही में मंदिर जाने के लिए कतार में खड़े एक श्रद्धालु की मौत हो गई थी, जिससे राज्य की बदनामी हुई।'
मंदिर के एक द्वार ही श्रद्धालुओं के लिए खुले हुए हैं
उन्होंने राज्य की बीजेडी सरकार पर आरोप लगाया कि करीब 24 वर्षों से सत्ता में रहने के बाद भी इसने मंदिर के विकास के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आम जनता के लिए मंदिर के चार में से तीन द्वारों को बंद कर दिया है, जिससे श्रद्धालुओं को बहुत दिक्कत होती है।
रत्न भंडार खोलने की भी तेज हुई मांग
यही नहीं कांग्रेस ने राज्य सरकार से जगन्नाथ मंदिर के खजाने में जमा आभूषणों और कीमती सामानों की मरम्मत और विस्तृत सूची बनाने के लिए इसके रत्न भंडार को भी खोलने की मांग की है। कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बाहिनिपति ने कहा कि 'रत्न भंडार काफी समय से नहीं खोला गया है। कोई नहीं जानता कि खजाने में रखा सारा बेशकीमती सामान सुरक्षित है या नहीं। इसलिए भंडार खोलना चाहिए और भगवान के सोने और अन्य आभूषणों की एक विस्तृत सूची तैयार की जानी चाहिए।'
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि कार्तिक मास शुरू होने से पहले अगर उसकी मांगें नहीं मानी गई तो विरोध-प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा। मंदिर के मुख्य प्रशासक ने कहा है कि ज्ञापन को राज्यपाल के पास भेज दिया जाएगा और मांगों को देखने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। उधर बीजेपी ने भी अभी तक रत्न भंडार नहीं खोलने और सूची नहीं तैयार किए जाने को लेकर सरकार की आलोचना की है।
श्रीमंदिर परिक्रमा प्रोजेक्ट के लिए बंद रखा है द्वार- बीजेडी
उधर सत्ताधारी बीजू जनता दल नेता अमर सत्पथी ने कहा है कि श्रद्धालुओं को परेशान करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर के तीनों द्वार को श्रीमंदिर परिक्रमा प्रोजेक्ट के लिए बंद किया गया है। रत्न भंडार खोलने को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में अदालत के निर्देशों का पालन करेगी और कानून विभाग उसके आदेश की पड़ताल कर रहा है।
बता दें कि पवित्र जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार कोविड पाबंदियों को देखते हुए 20 मार्च, 2020 को बंद कर दिया गया था। जब हालात बेहतर हुए तो मंदिर का सिंहद्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
इस साल जुलाई में राज्य सरकार ने मंदिर का पश्चिम द्वार भी खोल दिया, लेकिन यह सिर्फ पुरी के स्थानीय निवासियों के लिए खोला गया, जो दैनिक अनुष्ठान में शामिल होते हैं। लेकिन, सिंहद्वार छोड़कर बाकी सभी द्वार मंदिर के आसपास चल रहे परिक्रमा प्रोजेक्ट की वजह से अन्य सभी श्रद्धालुओं के लिए बंद रखे गए हैं। (इनपुट- पीटीआई)












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