पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में बढ़ रहा मोटापा, इस धर्म की महिलाओं में सबसे ज्यादा मामले
बुलेटिन में सामाजिक ढांचे के आधार पर भी महिलाओं के बीच बढ़ रही मोटापे की समस्या का अध्ययन किया गया है।
नई दिल्ली, 10 सिंतबर: मोटापा...वो समस्या, जिससे लोग शायद सबसे ज्यादा परेशान हैं। फास्ट फूड को लेकर बढ़ती दीवानगी, बिना सिस्टम वाला लाइफ स्टाइल और एक्सरसाइज से दूरी...लोगों को लगातार मोटापे का शिकार बना रही है। जो समस्या पहले केवल शहरों तक थी, अब गांव देहात में भी लोग उसके शिकार हो रहे हैं। इस बीच मोटापे को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। इस जानकारी में बताया गया है कि पुरुषों के मुकाबले अब महिलाओं में मोटापे की समस्या ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।

महिलाओं का आंकड़ा 24 फीसदी, पुरुषों का 22.9 फीसदी
हैदराबाद में 'काउंसिल फॉर सोशल डेवलेपमेंट' रिसर्च संस्थान ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2019-2021) के बीएमआई डेटा का इस्तेमाल करते हुए एक बुलेटिन जारी किया है। इस बुलेटिन में दक्षिण भारतीय राज्यों- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में महिलाओं में मोटापे की समस्या पर अध्ययन करते हुए बताया गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं मोटापे से ज्यादा ग्रस्त हैं। बुलेटिन के मुताबिक, देश में मोटापे के मामले में महिलाओं का आंकड़ा 24 फीसदी, जबकि पुरुषों का 22.9 फीसदी है।

दक्षिण भारत के 120 जिलों में किया गया अध्ययन
आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में भी महिलाओं और पुरुषों के बीच मोटापे का अनुपात यही है। कर्नाटक और तेलंगाना में हालांकि ये आंकड़ा कुछ कम है, लेकिन दक्षिण भारत के सभी राज्यों में महिलाओं और पुरुषों का ये स्तर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। इस बुलेटिन के लिए दक्षिण भारत के 120 जिलों- जिनमें तेलंगाना के 31 जिले, कर्नाटक के 30, आंध्र प्रदेश के 13, केरल के 14 और तमिलनाडु के 32 जिलों में 15 से 49 साल की महिलाओं के बीच अध्ययन किया गया था।

इस धर्म की महिलाएं सबसे ज्यादा मोटापे का शिकर
इस रिसर्च में यह भी खुलासा हुआ है कि राष्ट्रीय स्तर पर ईसाई धर्म की महिलाओं में मोटापे के मामले सबसे ज्यादा 31.2 फीसदी हैं। वहीं, मुस्लिम और हिंदू धर्म की महिलाओं में भी ये आंकड़ा एक चौथाई से ज्यादा या उसके आसपास है। इसके अलावा दक्षिणी राज्यों- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में मुस्मिल धर्म की महिलाओं में मोटापे के मामले ज्यादा हैं।

किस वर्ग की महिलाओं में मोटापे के ज्यादा मामले
बुलेटिन में सामाजिक ढांचे के आधार पर भी महिलाओं के बीच बढ़ रही मोटापे की समस्या का अध्ययन किया गया है। रिसर्च के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर मोटापे के सबसे कम मामले अनुसूचित जनजाति की महिलाओं- 12.6 फीसदी, इसके बाद अनुसूचित जाति की महिलाओं- 21.6 फीसदी, अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं में 24.6 फीसदी और इसके बाद अन्य महिलाओं में ये आंकड़ा 29.6 फीसदी पाया गया। दक्षिण भारत के राज्यों में भी महिलाओं में मोटापे का यही पैटर्न देखने को मिला।












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