I.N.D.I.A. शासित राज्यों में टॉप अफसरों में कितने OBC हैं? कांग्रेस सरकारों का ट्रैक रिकॉर्ड देखिए
महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर संसद के विशेष सत्र में चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ओबीसी वोट बैंक को रिझाने के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक बयान दिया था। उनके मुताबिक केंद्रीय मंत्रालयों में 90 में से सिर्फ 3 सचिव ही अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के हैं, बाकि सामान्य वर्ग से आते हैं।
लेकिन, अगर ट्रैक रिकॉर्ड की बात करें तो इस मामले में कांग्रेस सरकार का अपना आंकड़ा बहुत ही खराब है। मसलन, अभी 4 राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, और सभी जगहों पर मुख्य सचिव सामान्य वर्ग के ही अधिकारी हैं।

I.N.D.I.A.शासित राज्यों का हाल जानिए
यही नहीं, अन्य राज्यों में भी जहां विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेलवपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस (इंडिया) में शामिल दलों की सरकारें हैं, वहां सिर्फ तमिलनाडु को छोड़कर सारे मुख्य सचिव भी सामान्य वर्ग के अधिकारी हैं। तमिलनाडु में डीएमके की सरकार में कांग्रेस भी सहयोगी है और सिर्फ वहां के चीफ सेक्रेटरी अनुसूचित जाति के हैं। राहुल गांधी की पार्टी के सहयोगी दलों के शासन वाले अन्य सभी राज्यों में मुख्य सचिव सामान्य वर्ग के हैं।
केरल - वी वेनू (ऊंची जाति)
झारखंड- सुखदेव सिंह (ऊंची जाति)
छत्तीसगढ़- अमिताभ जैन (ऊंची जाति)
पश्चिम बंगाल- एच के द्विवेदी (ऊंची जाति)
बिहार- आमिर सुबहानी (ऊंची जाति)
कर्नाटक- वंदिता शर्मा (ऊंची जाति)
राजस्थान- ऊषा शर्मा (ऊंची जाति)
पंजाब- अनुराग वर्मा (ऊंची जाति)
हिमाचल प्रदेश- प्रबोध सक्सेना (ऊंची जाति)
तमिलनाडु- शिव दास मीणा (अनुसूचित जनजाति)
राहुल गांधी ने क्या किया था दावा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिर्फ लोकसभा में ही नहीं, बल्कि 25 सितंबर को छत्तीसगढ़ में एक रैली के दौरान भी अपनी बात दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि भारत सरकार के 90 सचिवों में से सिर्फ 3 ही ओबीसी हैं। उन्होंने दावा किया था, 'इन सचिवों (ओबीसी) का बजट पर सिर्फ 5% नियंत्रण है। अगर देश का बजट 44 लाख करोड़ रुपए है, तो इनका सिर्फ 2.2 लाख करोड़ के बजट पर कंट्रोल है।'
कांग्रेस सरकारों का ट्रैक रिकॉर्ड
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1985 से लेकर 1989 के बीच जब राजीव गांधी की सरकार थी, तब केंद्र में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के एक भी सचिव नहीं थे। 2023 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है, तो 7 सचिव अनुसूचित जाति के और 5 अनुसूचित जनजाति के हैं। अगर ओबीसी की बात करें तो 2014 में जहां अतिरिक्त सचिव/संयुक्त सचिव स्तर के केंद्र में सिर्फ दो अफसर थे, आज की तारीख में उनकी संख्या बढ़कर 63 हो चुकी है।
एक आंकड़ा तो और भी बहुत दिलचस्प है। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में सभी प्रधानमंत्रियों के प्रधान सचिव (principal secretary)/सचिव ऊंची जातियों के ही अधिकारी थे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी आरक्षण 1993 से लागू हुआ था और इस वर्ग के अधिकारी 1995 बैच से सेवा में आए थे। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मामलों के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के मुताबिक, 'एक आईएएस अफसर को सचिव स्तर तक पहुंचने में ढाई दशक से ज्यादा लग जाता है। मंडल कमीशन रिपोर्ट लागू होने के बाद ओबीसी अफसरों के पहले बैच की भर्ती 1995 में हुई थी और उन्हें अब सचिव स्तर की जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।'












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