बढ़ती गई निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या

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लखनऊ। देश में अब तक हुए 15 लोकसभा चुनावों पर गौर करें तो मैदान में ताल ठोकने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों की तादाद हर चुनाव में बढ़ती गई है। इनकी जीत हालांकि कम ही हुई है।

यह स्थिति तब है जब निर्वाचन आयोग ने नामांकन राशि पिछले वर्ष के 10,000 से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी है। पिछले चुनाव की तरह इस बार भी जमानत गंवाने वाले उम्मीदवार राजकीय खजाने को भरने में अहम भूमिका अदा करेंगे।

16वीं लोकसभा के लिए बिछी चुनावी बिसात पर दांव-पेंच का दौर चरम पर है। गठबंधन सरकार की आशंका के बीच समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति भी जोर पकड़ने लगी है और

बरकरार है जज्‍बा
इन सबके बीच लगभग हर चुनाव में करारी शिकस्त का अंदेशा होने के बावजूद निर्दलीय प्रत्याशियों के जज्बे में कोई कमी नहीं आई है। देश में अब तक हुए 15 लोकसभा चुनावों में 74,954 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई जिसमें निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या 41,271 थी जबकि इनमें से केवल 223 प्रत्याशी ही संसद भवन का दरवाजा लांघ पाए और 41,048 प्रत्याशी तो अपनी जमानत तक गंवा बैठे।

निर्दलीय प्रत्याशियों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने के लिए आयोग ने सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में किस्मत आजमाने वाले प्रत्याशियों के लिए नामांकन राशि पिछले वर्ष के दस हजार रुपये की तुलना में 25 हजार रुपये कर दी है। इसके बावजूद निर्दलीयों के ताल ठोकने के जज्बे में कोई कमी नहीं आई है।

वर्ष 2009 में थे 3,831 निर्दलीय प्रत्‍याशी
वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में 3,831 निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई जिसमें मात्र नौ संसद की देहरी लांघ पाने में सफल हुए। गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 2222 उम्मीदवारों ने नामांकन कराया मगर केवल 12 को मतदाताओं ने हरी झंडी दिखाई।

वर्ष 2009 में राष्ट्रीय पार्टियों की अपेक्षा क्षेत्रीय दलों का डंका खूब बजा। राष्ट्रीय दलों के 1623 प्रत्याशियों में 376 संसद भवन पहुंचने में सफल हुए जबकि मतदाताओं ने क्षेत्रीय दलों के 394 उम्मीदवारों में से 146 को संसद भेजा।

पहले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 533
पहले चुनाव की बात करें तो 1952 में 533 निर्दलीय उम्मीदवारों में से जहां 37 ने लोकसभा में अपनी जगह पक्की की, वहीं अगले चुनाव के दौरान 481 में से 42 उम्मीदवार विजयी घोषित हुए। इनमें से 67 प्रतिशत से अधिक की जमानत जब्त हो गई। निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए इसके आगे की राह कठिन ही होती गई और लगभग हर चुनाव में इन्हें न केवल जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा, बल्कि जमानत जब्त कराने के प्रतिशत में उत्तरोत्तर इजाफा होता गया।

60 के दशक से होता गया इजाफा
यहां यह तथ्य भी दिलचस्प है कि इस दौरान हार और जमानत जब्त होने का अंदेशा ज्यों-ज्यों बढ़ रहा था उसी अंदाज में चुनावी महासमर में भाग लेने वाले प्रत्याशियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा था। वर्ष 1962 में जमानत जब्त कराने वाले प्रत्याशियों का प्रतिशत जहां 78.91 था वहीं 90 के दशक में यह 99 प्रतिशत से अधिक हो गया। वर्ष 1996 में सर्वाधिक 10635 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में शिरकत की जिसमें सिर्फ नौ को विजय हासिल हुई जबकि 99.71 प्रतिशत की जमानत जब्त हो गई।

अब तक 500 प्रत्‍याशी
वर्ष 2004 के लोकसभा के चुनाव में 2385 निर्दलीयों में मात्र पांच संसद भवन पहुंचे, जिनमें से एक उत्तर प्रदेश की अमरोहा सीट से निर्वाचित हुए थे। 16वीं लोकसभा के चुनाव में 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में मतदान के चौथे चरण का मतदान समाप्त हो चुका है। इस चुनाव में अब तक 500 से अधिक निर्दलीय प्रत्याशी अपना नामांकन करा चुके हैं।

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