और ताकतवर हुआ भारत, सतह से सतह पर वार करने वाली पृथ्वी-2 मिसाइल का परीक्षण

यह परीक्षण भारतीय सेना के सामरिक बल कमान (एसएफसी) ने नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में किया। युद्ध में प्रयोग होने वाली यह मिसाइल 483 सेकेंड की उड़ान अवधि और 43.5 किलोमीटर ऊंची चोटी तक 500 किलोग्राम बम ले जा सकती है। इसकी वजन क्षमता को 1000 किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है। इंटीग्रेटिड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के विकसित की जा रही पांच मिसाइलों में से पृथ्वी महत्वपूर्ण मिसाइल है।
पृथ्वी-2 के परीक्षण के मौके पर कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद थे।
विशेष रूप गठित रणनीतिक बल कमान [एफएफसी] ने प्रक्षेपण की प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस पूरी प्रक्रिया पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] के वैज्ञानिकों ने कड़ी नजर रखी। डीआरडीओ के राडरों इलेक्ट्रो एप्टिकल ट्रेकिंग प्रणालियों और ओडिशा के तट पर स्थित टेली मेट्री स्टेशनों की मदद से इसके पथ पर नजर रखी गई। बंगाल की खाड़ी में मिसाइल के लक्ष्य पर निगरानी के लिए एक पोत पर भी टीम तैनात थी।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2003 में भारत के रणनीतिक बल कमान में शामिल पृथ्वी-2 मिसाइल देश के प्रतिष्ठित आइजीएमबीटी एकीकृत निदेशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई पहली मिसाइल है। इसकी प्रौद्योगिकी साबित हो चुकी है।












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