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नेपाल-बांग्लादेश 'तख्तापलट' पर NSA डोभाल का बड़ा बयान, क्यों कहा भारत को सरदार पटेल की दूरदर्शिता की जरूरत?

Ajit Doval NSA: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है और इस परिवर्तन से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दुनिया भी एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है, जिसके लिए हमें खुद को मजबूत करना होगा।

इस दौरान उन्होंने पड़ोसी देशों में हुए तख्तापलट को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। एनएसए ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और अन्य देशों में गैर-संवैधानिक तरीकों से सत्ता परिवर्तन मुख्य रूप से कुशासन (poor governance) की वजह से हुआ। डोभाल ने राष्ट्र निर्माण में सरकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आज भारत को सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता की सबसे अधिक जरूरत है।

Ajit Doval NSA

पड़ोसी देशों में तख्तापलट और कुशासन

NSA अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में भारत के पड़ोसी देशों में सत्ता परिवर्तन के लिए कुशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और अन्य देशों में जो गैर-संवैधानिक तरीके से सत्ता बदली है, वह केवल कमजोर और स्वार्थ से प्रेरित सरकारों का परिणाम है। डोभाल ने स्पष्ट किया कि कोई भी देश-चाहे वह शक्तिशाली हो या कमजोर-वास्तव में अपनी सरकारों की शक्ति से ही पहचाना जाता है। जब सरकारें कमजोर होती हैं, तो परिणाम भी वैसे ही आते हैं, जिससे अंततः राष्ट्र का पतन होता है।

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राष्ट्र निर्माण में संस्थाओं की भूमिका

डोभाल ने राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में संस्थाओं (Institutions) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकारें इन संस्थाओं के माध्यम से ही काम करती हैं, और राष्ट्र निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण वे लोग हैं जो इन संस्थाओं का निर्माण करते हैं। उनका मानना है कि महान साम्राज्यों, राजतंत्रों या लोकतंत्रों का उत्थान और पतन वहां की सरकार की वजह से होता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसे लक्ष्यों की प्राप्ति कराने में मजबूत और प्रभावी सरकार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है।

बदलाव के दौर से गुजर रहा भारत

NSA डोभाल ने कहा कि भारत इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यह परिवर्तन केवल शासन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुरानी तरह के सरकारी-सामाजिक ढांचे और वैश्विक व्यवस्था में भी बदलाव ला रहा है। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी बड़े परिवर्तन में सबसे जरूरी बात यह है कि उससे डरा न जाए और संभावित खतरों के आगे झुका न जाए। डोभाल ने राष्ट्र को खुद को मजबूत कर तैयार करने का आह्वान किया और कहा कि सरकार को सामान्य अपेक्षा से हटकर सोचना और काम करना होगा।

सरदार पटेल की दूरदर्शिता की जरूरत

अपने भाषण में अजीत डोभाल ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को याद किया। उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि यह बहुत जरूरी है कि 2025 में हम सरदार पटेल को फिर से गढ़ें। आज भारत में उनकी दूरदर्शिता की पहले से कहीं अधिक जरूरत है।" डोभाल ने यह भी कहा कि देश को अपने कानूनों, नियमों और प्रक्रियाओं की पूरी व्यवस्था पर गौर करना होगा और उन्हें लोगों के प्रति अधिक अनुकूल बनाना होगा। इसके साथ ही, लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और उन्हें सुरक्षा की भावना देना भी सरकार की अहम जिम्मेदारी है।

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