सुपरटेक ट्विन टावर को गिराने का काउंटडाउन शुरू, 7000 लोगों को कराया गया खाली, 15 सेकेंड में होंगे धराशायी
15 सेकेंड में धराशायी हो जाएगा सुपरटेक का ट्विन टावर
नई दिल्ली। नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। 28 अगस्त को सुबह 2.30 बजे से इन टावरों को गिराया जाएगा। कुतुबमिनार से भी ऊंची इमारत मात्र 15 सेकेंड में ध्वस्त हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस ट्विन टावर को गिराने का काम किया जा रहा है, जिसे लेकर सारी तैयारियां अब पूरी कर ली गई है।

15 सेकेंड में ध्वस्त हो जाएगा ट्विन टावर
नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराने की सारी तैयारियां कर ली गई है। इन टावरों को 28 अगस्त को दोपहर 2.30 बजे गिराया जाएगा। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से इस इमारत को गिराया जाएगा। मुंबई स्थित कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग ने इस टावर को गिराने के लिए दक्षिण अफ्रीका की कंपनी जेट डिमोलिशंस के साथ साझेदारी की। दुनिया के बड़े दिग्गज इंजीनियरों की टीम इस काम को अंजाम देगी।

3700 किलो विस्फोटक
इस टावर को गिराने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अंजाम देंगे। इसके लिए 3700 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस ट्विन टावर को ढहाने के बाद 55000 टन के मलबे का निस्तारण करना होगा। टावर को गिराने से पहले पुलिस और प्रशासन से सभी जरूरी उपाय कर लिए हैं। आसपास के इलाकों को साफ कर दिया गया है।

7000 लोगों को खाली करवाया गया
ट्विन टावर को गिराने के लिए आसपास के इलाकों को खाली करवाया जा रहा है। एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज के फ्लैट में रहने वाले लोगों को 28 अगस्त को सुबह 7 बजे तक खाली करने को कहा जा रहा है। करीब 7000 लोगों को उस दौरान घर खाली करने को कहा गया है। वहीं ट्वीन टावर के आसपास के इलाकों को बंद किया जाएगा। उस इलाके में 28 अगस्त को किसी को भी आने-जाने से रोका जाएगा। टावर को गिराने के बाद वहां उठे धूल के अंबार को रोकने के लिए इमारतों को ढकने का काम किया जा रहा है। वहीं आरड्ब्लूए रेसिडेंट्स को सलाह दे रही है कि वो क्या करें और क्या न करें। आसपास की हरियाली को बचाने के लिए काम जारी है।

क्या है पूरा विवाद
साल 2009 में सुपरटेक ने इन विवादित ट्विन टावर को बनाने का काम शुरू किया। सोसाइटी में रह रहे लोगों ने इस टावर को लेकर आपत्ति जताई और साल 2012 में मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया। डेढ़ साल तक सुनवाई चली और 11 अप्रैल 2014 में हाईकोर्ट ने विवादित टावर को गिराने का आदेश दिया। जिसके बाद सुपरटेक ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और फिर 31 अगस्त 2021 को उच्चतम न्यायालय ने खरीदारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ट्विट टावर को तीन महीने के भीतर गिराने का आदेश दिया।












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