दुनिया के 30 देशों में फैला कोरोना का लैम्ब्डा वेरिएंट, भारत में क्या है इसकी स्थिति, जानें
कोरोना वायरस का खतरनाक लैम्ब्डा वेरिएंट अब तक 30 देशों में पाया जा चुका है। हालांकि भारत में लैम्ब्डा वेरिएंट का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है।
नई दिल्ली, 7 जुलाई। कोरोना वायरस का खतरनाक लैम्ब्डा वेरिएंट अब तक 30 देशों में पाया जा चुका है। हालांकि भारत में लैम्ब्डा वेरिएंट का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। केंद्र सरकार ने इस बात की जानकारी दी। माना जा रहा है कि इस वेरिएंट की उत्पत्ति पेरू में हुई है और वहां यह वेरिएंट कोरोना संक्रमण का प्रमुख कारक बना हुआ है।
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इस वेरिएंट से बचाव के लिए पेरू के अलावा दक्षिण अमेरिकी देशों जैसे चिली और उरुग्वे ने 12 साल की उम्र के कुछ विकलांग बच्चों को अपने यहां फाइजर की वैक्सीन देनी शुरू कर दी है। पेरू में उसकी जनसंख्या की तुलना में कोरोना के कारण सबसे अधिक मौतें हुई हैं। देश में प्रति 1 लाख निवासियों पर 587 मौतें हुई हैं।
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देश के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, कोविड-19 के लिए जांचे गए 81 फीसदी नमूनों में लैम्ब्डा वेरिएंट पाया गया है। डब्ल्यूएचओ ने इसको लेकर पहले ही चिंता व्यक्त की है और इस पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है। हालांकि अमेरिका ने अभी इसे गंभीर वेरिएंट की श्रेणी नें नहीं रखा है।
अन्य वेरिएंट के मुकाबले तेजी से फैलता है लेम्ब्डा
माना जाता है कि लैम्ब्डा कोविड -19 के मूल रूपों की तुलना में तेजी से फैलता है, हालांकि रिसर्चरों ने कहा है कि अभी इसको लेकर और स्टडी करने की जरूरत है।
लैम्ब्डा पर कम प्रभावी है कोरोना की वैक्सीन
कोरोना वायरस की मौजूदा वैक्सीनों को कोरोना के लैम्ब्डा वेरिएंट पर कम प्रभावी माना गया है। हालांकि रिसर्चरों ने इसको लेकर भी और अधिक आंकड़े जुटाने की जरूरत महसूस की है। भारत में मार्च अप्रैल में कोरोना की भयानक लहर देखने को मिली थी, इस भयानक लहर का कारण डेल्टा वेरिएंट बना था, जो मूल अल्फा स्ट्रेन से लगभग 60 प्रतिशत तेज है। भारत में कोरोना की पीक के दौरान कोरोना के जो मामले 4 लाख की संख्या को पार कर गए थे, घटकर 40 हजार से भी कम रह गये हैं।












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