Parliament Explained: संसद में सांसदों की कुर्सी कैसे तय की जाती है, जानें किस फॉर्मूले का होता है इस्तेमाल
New Parliament Explained: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद नई सरकार का गठन हो गया है। देश में लगातार तीसरी बार एनडीए की सरकार सत्ता संभालेगी। ऐसे में 18वीं लोकसभा चुनाव में जीते सांसद संसद पहुंचने को है। जल्द ही लोकसभा का पहला सत्र भी शुरू होने वाला है।
इससे पहले संसद के सत्र को लेकर कई तरह की तैयारियों को अंजाम दिया जाएगा। जैसे सभी सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही स्पीकर का चुनाव होना है। वहीं जीतकर आए 543 सांसद कहां बैठेंगे इसका भी फैसला किया जाएगा। ऐसे में 18वीं लोकसभा में नई संसद के अंदर क्या कुछ बदलाव आएगा। बात होगी इसी मुद्दे पर?

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब बारी हैं सांसदों के संसद पहुंचने की, जहां इस बात का फैसला होगा कि कौनसा सांसद पहली पंक्ति में बैठेगा, कौन दूसरी और कौन पीछे वाली लाइनों में बैठेगा। 5 साल के सभी 543 सांसदों की सीट को लेकर फैसला किया जाएगा।
नई संसद का कार्यकाल शुरू होने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 18वीं लोकसभा के लिए चुने गए 543 नवनिर्वाचित सांसदों के शपथ ग्रहण के लिए 18 जून से लोकसभा का सत्र शुरू हो सकता है। सत्र के पहले दो दिनों के दौरान यानी 18 और 19 जून को नव निर्वाचित सांसदों को सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई जा सकती है।
मंत्रियों के शपथ लेने के बाद संसद भवन में सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी और इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। हालांकि इससे पहले प्रोटेम स्पीकर को नियुक्त किया जाएगा, जो कि सभी सांसदों को शपथ दिलाएंगे।
सांसदों को कौन दिलाता है शपथ
मंत्रियों के शपथ लेने के बाद संसद भवन में सांसदों को शपथ दिलाई जाती है। यह शपथ उपराष्ट्रपति या फिर उनकी और से निर्धारित अन्य सदस्य दिलाते हैं। शपथ लेने के बाद ही कोई सांसद सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकता है। इसी के साथ उसे कुछ विशेषाधिकार भी मिलते हैं। साथ ही सदन में वोटिंग का अधिकार भी मिलता है।
लोकसभा स्पीकर का चुनाव
लोकसभा की पहली बैठक के बाद लोकसभा अध्यक्ष की नियुक्ति होती है। इसके लिए लोकसभा के सदस्य यानी सांसद बहुमत के आधार पर करते हैं। लोकसभा स्पीकर की भूमिका सदन चलाने के लिए अहम होती है। वो सदन में सबसे वरिष्ठ माने जाते हैं। वहीं स्पीकर के चुनाव का दिन भी राष्ट्रपति तय करते हैं।
जानिए क्या होती है स्पीकर की जिम्मेदारी?
लोकसभा सुचारू रूप से चले ये स्पीकर की जिम्मेदारी होती है। साथ ही वो सदन के सदस्यों के अधिकारों की भी रक्षा करते हैं। साथ ही हाउस का अनुशासन भी बनाते हैं। संसदीय मामलों में उनका फैसला सर्वोपरि होता है। साथ ही अध्यक्ष की मुख्य जिम्मेदारियों में संसद की संयुक्त बैठक बुलाना, विपक्ष के नेता को मान्यता देना दल-बदल कानून के तहत किसी सांसद की सदस्यता पर फैसला लेना और संसद में पेश बिलों पर वोटिंग कराना होता है।
इस फॉर्मूले से होती है सांसदों की कुर्सी तय?
कौन सांसद किस सीट पर बैठगा इसका फैसला एक फॉर्मूले के तहत किया जाता है। दरअसल, वो ऐसा है कि जिस दल या गठबंधन को जितनी सीटें मिल जाए। उसको उस लाइन की सीटों से गुणा किया जाता है। इसके बाद जो नंबर आता है, उसको सदन की कुल सीटों से डिवाइड किया जाता है। जिसके बाद जो संख्या डिवाइड करने से आती है, उतनी सीटें उन सांसदों को सामने की पंक्तियों में मिल जाती है।
वहीं स्पीकर के दाहिने तरफ पक्ष यानी सरकार के लोग बैठते हैं। तो बाईं ओर विपक्षी दल के सांसद बैठते हैं। जिनमें सबसे पहले विपक्ष के नेता और फिर उनके वरिष्ठ सांसद को जगह दी जाती है।












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