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मुशर्रफ की तरह भारत के खिलाफ जंग का ऐलान कर सकते हैं नए पाक आर्मी चीफ बाजवा

पीओके के अनुभव के साथ पाकिस्‍तान के नए आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा का अहमदिया समुदाय से है गहरा ताल्‍लुक। पाक के लिए वफादारी साबित करने के लिए जंग का ऐलान करने से भी नहीं हिचक‍ेंगे।

नई दिल्‍ली।लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा रावलपिंडी के नए मुखिया हैं और यहां से सेना की कमान संभालेंगे। लेफ्टिेनेंट जनरल बाजवा का जन्‍म घाकर मंडी पंजाब, पाकिस्‍तान में हुआ था।

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पिता भी थे सेना में

उनके पिता कर्नल मुहम्‍मद इकबाल बाजवा भी पाकिस्‍तान सेना में थे तो उनके ससुर भी पाक सेना में मेजर जनरल होकर रिटायर हुए।

अब आप समझ सकते हैं कि वह एक ऐसे खानदान से आते हैं जहां हमेशा भारत के खिलाफ एजेंडे को बढ़ावा दिया गया।

भारत के खिलाफ होगी नीति

पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा को पाकिस्‍तान सेना का अगला मुखिया बनाने का ऐलान किया। बजावा छठवें सेना प्रमुख होंगे जिनके नाम का ऐलान पीएम शरीफ ने किया है।

उनके नाम के ऐलान के साथ ही भारत को भी यकीन हो गया है कि भारत के खिलाफ पाक की नीति का विस्‍तार करने की पूरी तैयारी हो चुकी है।

पीएम शरीफ की छठीं नियुक्ति

बाजवा से पहले पीएम नवाज शरीफ ने पांच सेना प्रमुखों की नियुक्ति की थी। वर्ष 1991 में जनरल आसिफ नवाज जंजुआ, 1993 में जनरल वाहीद काकर, 1998 में जनरल परवेज मुशर्रफ और 2013 में जनरल राहील शरीफ।

भले ही जनरल राहील शरीफ ने तीन वर्षों में भारत के खिलाफ जंग का ऐलान न किया हो लेकिन जनरल बाजवा ऐसा कर सकते हैं।

अहमदिया समुदाय के जनरल

जनरल बाजवा अहमदिया समुदाय से आते हैं और इस समुदाय को हमेशा से पाकिस्‍तान में उनके धार्मिक विश्‍वासों की वजह से शक का सामना करना पड़ा है।

एक मीडिय‍ा रिपोर्ट की मानें तो जनरल बाजवा की नियुक्ति पाक में अहमदिया समुदाय के संघर्ष को पहचान दिलाने वाली है।

पाक में हमेशा से अहमदिया मुसलमानों को काफिर का दर्जा दिया जाता है। वर्ष 1984 में पाक में एक कानून आया जिसके बाद अहमदिया समुदाय के लोगों को खुद को मुसलमान साबित करना पड़ता था।

वहीं इकोनॉमिक टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक‍ ऐसा हो सकता है कि पाकिस्‍तान के लिए अपना देश प्रेम साबित करने के लिए बाजवा भारत के खिलाफ जंग का ऐलान कर दें।

मुशर्रफ की तरह साबित करेंगे देश प्रेम!

वर्ष 1999 में उस समय के पाक आर्मी चीफ जनरल परवेज मुशर्रफ ने जब भारत के खिलाफ जंग छेड़ी तो कई लोगों ने दबी जुबान में कहा कि मुशर्रफ ने अपने देश प्रेम को साबित करने के लिए यह कदम उठाया था।

परवेज मुशर्रफ एक मुजाहिर थे। उनका जन्‍म दिल्‍ली में हुआ था और उनकी नियुक्ति ऐसे समय पर हुई थी जब भारत और पाक दोनों परमाणु श‍क्ति से संपन्‍न देश बन चुके थे।

इसके बाद वर्ष 1999 में जब भारत ने लाहौर बस यात्रा की शुरुआत पाक के साथ संबंध अच्‍छे करने के मकसद से की थी तो उस समय पाक में एक तबके को यह नागवार गुजरा था। इसका नतीजा कारगिल की जंग के तौर पर सामने आया।

पीओके का अच्‍छा खासा अनुभव

जब कारगिल वॉर शुरू हुआ तो किसी को मालूम नहीं था कि मुशर्रफ की पोस्टिंग किन हिस्‍सो में थी।

इससे अलग वर्ष 2014 में जब भारत और पाक के बीच एलओसी पर नए तनाव की शुरुआत होने लगी तो उस समय बाजवा पाकिस्‍तान X कॉर्प्‍स को संभाल रहे थे जिसकी दो ब्रिगेडी पीओके और एलओसी के आसपास मौजूद हैं।

इसके अलावा उनकी तैनाती ज्‍यादातर ऐसे हिस्‍सों में रही है जो कश्‍मीर और सियाचिन से सटे हुए हैं।

जनरल बाजवा कश्‍मीर के इतिहास से भी वाकिफ हैं और पाक मीडिया ने तो उन्‍हें एक बार पाक के लिए भारत से भी बड़ा खतरा करार दे दिया था।

पीएम के फैसले को सही साबित करेंगे!

जनरल बाजवा के नाम का ऐलान काफी चौंकाने वाला था। इस पद के लिए लेफ्टिनेंट जनरल इश्‍हाक नदीम अहमद के नाम की चर्चाएं काफी तेज थीं।

विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम ने बाजवा की नियुक्ति के साथ पाक में बसी अहमदिया कम्‍यूनिटी को पहचान देने का एक कदम उठाया है तो हो सकता है कि वह भी अपनी वफादारी और पाक प्रेम को साबित करने के लिए कुछ भी कर दे।

इसमें भारत के खिलाफ और आक्रामक होना सबसे ऊपर होगा।

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