पूजा खेडकर को ऑडी कार पर धौंस जताना पड़ा भारी, जानिए आखिर किस नियम ने बढ़ाई उनकी मुश्किल
Pooja Khedkar: ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। उन्हें महाराष्ट्र के वाशिम जिले का असिस्टेंट कलेक्टर बनाया गया है। पूजा ने 2021 में यूपीएससी की परीक्षा में 841वीं रैंक हासिल की थी। पूजा की मां अहमदनगर जिले के भालगांव की सरपंच हैं। उनके परिवार में पिता और दादा दोनों प्रशासनिक सेवा में रहे हैं। पूजा के पिता पुणे के सहायक कलेक्टर भी रह चुके हैं।
वाशिम में ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद पुणे में पूजा की कार को लेकर विवाद हो रहा है। पूजा ने ऑडी कार पर लाल और नीली बत्ती लगाकर घूमती थीं, वह दफ्तर भी इसी कार से आती थीं। उनकी इस कार पर सरकारी प्लेट और लाल बत्ती लगी थी।

ट्रैफिक पुलिस ने भेजा नोटिस
पुणे ट्रैफिक पुलिस की ओर से गुरुवार को पूजा खेडकर को नोटिस भेज दिया गया है। उन्हें यह नोटिस महाराष्ट्र सरकार का बोर्ड और लाल-नीली बत्ती कार पर लगाने की वजह से भेजा गया है। पूजा की ऑडी कार प्राइवेट कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। इसपर कुल 21 चालान हैं। जिसका कुल बकाया 27000 रुपए है।
किस नियम के तहत हुई कार्रवाई
दरअसल वर्ष 2017 में भारत सरकार ने वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए वाहनों पर लाल और नीली बत्ती लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसके लेकर बड़ा संशोधन किया था। 1 मई 2017 को इस नए नियम को लागू किया गया था।
जिसके अनुसार प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी अपनी गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती लगाने का अधिकार नहीं होगा। इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में बदलाव किए गए थे।
क्या है लाल-नीली बत्ती का नियम
फिलहाल लाल, पीली और नीली बत्ती आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों पर ही लगाई जा सकती है। उदाहरण के तौर पर यह बत्ती एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस और सेना के वाहनों के लिए आरक्षित है।
पहले केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 108 की धारा (III) के तहत कुछ सीमित लोगों को ड्यूटी के दौरान इन लाइटों का उपयोग करने की अनुमति थी। लेकिन निजी वाहनों पर इसका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं थी। लेकिन अब केवल आपातकालीन सेवा वाले वाहनों को ही ये लाइट लगाने की अनुमति है।
लाइटों की अलग-अलग श्रेणी
नियमों के अनुसार लाइटों के लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। वाहनों पर फ्लैशर के साथ लाल बत्ती, वाहनों पर फ्लैशर के बिना लाल बत्ती, पीली बत्ती, और वाहनों पर फ्लैशर के साथ नीली बत्ती आदि।
किन वाहनों पर यह बत्तियां लगाई जा सकती हैं यह केंद्र और राज्य सरकारें तय करती हैं। सरकार की ओर से यह संशोधन लोक सेवकों द्वारा विशेषाधिकारों के दुरुपयोग और भारत में वीआईपी संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए किया गया था।
पूजा खेडकर पर गंभीर आरोप
पूजा पर आरोप है कि उन्होंने आईएएस पद हासिल करने के लिए विकलांगता और ओबीसी आरक्षण कोटे का दुरुपयोग किया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें आंखों की समस्या सहित विकलांगता है।
लेकिन इसकी उन्होंने मेडिकल जांच नहीं कराई थी जिसके बाद विवाद बढ़ गया। साथ ही पूजा ने पर ओबीसी आरक्षण कोटे का दुरुपयोग करने का भी आरोप है।
कौन हैं पूजा
गौर करने वाली बात है कि पूजा खेडकर 2023 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने इससे पहले 2021 में मल्टीपल डिसेबिलिटी कैटेगरी के तहत सिविल सेवा परीक्षा पास की थी।
जिसमें उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में असिस्टेंट डायरेक्टर का पद मिला था। 2022 में उन्होंने परीक्षा में 821वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बन गईं। उनके पिता दिलीप खेडकर भी महाराष्ट्र सरकार में वरिष्ठ अधिकारी थे।
आईएएस अधिकारी के रूप में नियुक्ति से पहले पूजा को जिला कलेक्टर की देखरेख में प्रशिक्षण लेना पड़ा। हालांकि, आरोप है कि उन्होंने जॉइन करने से पहले कई मांगें कीं।












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