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New Labour Codes: महिलाओं को नए लेबर कोड में क्या मिला? वेतन से लेकर नाइट शिफ्ट नियमों की डिटेल देखें यहां

New Labour Codes: देश में 21 नवंबर 2025 से चार नए लेबर कोड (New Labour Codes India 2025) लागू हो गए हैं। इस नए कोड के साथ ही 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर दिया गया है। नए कानूनों में महिलाओं के लिए खास प्रावधान जोड़े गए हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव कर्मचारियों को समय पर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, बेहतर सामाजिक सुरक्षा, ग्रेच्युटी, समान अवसर और स्पष्ट अधिकार देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

नए लेबर कानूनों में महिलाओं के लिए कई प्रावधान जोड़े गए हैं। समान वेतनमान से लेकर नाइट शिफ्ट समेत दूसरे मोर्चों पर महिलाओं को समान भागीदारी मिल सके, इसकी कोशिश की गई है। महिलाओं के लिए कई सुधार किए गए हैं, जिसमें फैमिली की परिभाषा को भी विस्तार दिया गया है।

New Labour Codes women benefits

New Labour Codes में हर वर्ग के लिए खास प्रावधान

इन नए नियमों का फायदा स्थायी कर्मचारियों से लेकर कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ, गिग वर्कर्स, मीडिया कर्मियों और एमएसएमई सेक्टर के कर्मचारियों तक सभी को मिलेगा। इसी कड़ी में महिलाओं से जुड़े प्रावधान सबसे अधिक चर्चा में हैं, क्योंकि नई व्यवस्था में उनके लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।

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नए लेबर कानून में Women Benefits की लिस्ट

- नए लेबर कोड्स महिलाओं को कार्यस्थल पर समान अधिकार, बेहतर सुरक्षा और अधिक अवसर देने पर विशेष रूप से केंद्रित हैं।

- पहले कई उद्योगों में महिलाओं के काम करने पर कुछ पाबंदियां भी लागू थी। अब नियमों को वक्त की जरूरत के मुताबिक बदलाव किया गया है।

- समान अधिकार और नो-डिस्क्रिमिनेशन का प्रावधान: अब किसी भी महिला कर्मचारी के साथ वेतन, भर्ती प्रक्रिया, प्रमोशन या काम के असाइनमेंट में जेंडर के आधार पर भेदभाव करना पूरी तरह अवैध है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पुरुषों और महिलाओं के बीच किसी भी प्रकार की असमानता न हो।

- नाइट शिफ्ट में काम करने की स्वतंत्रता: पहले कई सेक्टर में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति नहीं थी। नए कोड के तहत महिलाएं अपनी सहमति से नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं। कंपनी को उनके लिए सुरक्षित परिवहन, सुरक्षा गार्ड और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।

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- खतरनाक उद्योगों में रोजगार के अवसर: अब महिलाएं अपनी मर्जी और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों के तहत अंडरग्राउंड माइनिंग, फैक्टरी ऑपरेशन्स और हैवी मशीनरी चलाने जैसे कार्य भी कर सकती हैं। पहले यह कई क्षेत्रों में प्रतिबंधित था। यह बदलाव महिलाओं के करियर विकल्पों का दायरा काफी बढ़ा देता है।

- शिकायत निवारण तंत्र और सुरक्षा: हर कंपनी और संस्थान को महिला सदस्यों वाली शिकायत समिति बनानी होगी। यह समिति कार्यस्थल पर उत्पीड़न, भेदभाव और सुरक्षा से जुड़े मामलों को देखेगी। इससे महिलाओं के लिए सुरक्षित और समर्थ वातावरण तैयार होगा।

- फैमिली की नई परिभाषा: नए नियमों में परिवार की परिभाषा बढ़ाकर उसमें ससुर और सास को भी शामिल किया गया है। इसका असर मातृत्व लाभ, बीमा, लीव और अन्य सुविधाओं पर पड़ेगा, जिससे महिला कर्मचारियों को अधिक सहायता और लचीलापन मिलेगा।

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