वैज्ञानिकों ने खोजा सौर मंडल का सबसे बौना ग्रह, सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगते हैं इतने साल

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ माइनर प्लैनेट सेंटर ने मंगलवार को सौर मंडल में एक अज्ञात बौने ग्रह मंडल को खोजने की घोषणा की है। सेंटर ने इसे 2015 टीजी 387 नाम दिया है जो कि छोटो होने के साथ-साथ गोलाकार बर्फ की एक गेंद जैसा है। बता दें कि इससे पहले खगोलविदों ने पहली बार 13 अक्टूबर, 2015 को सुबारू दूरबीन की मदद से हवाई के मौना केआ वेधशालाओं बौने ग्रह को देखा था। ग्रह के गुण और उसके अन्य लक्षणों को देखते हुए इसे 2015 टीजी 387 द गोब्लिन नाम दिया था।

लगभग 300 किलोमीटर है व्यास

लगभग 300 किलोमीटर है व्यास

वाशिंगटन में कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के एक खगोल वैज्ञानिक स्कॉट शेपर्ड ने कहा, गोब्लिन बौना ग्रह का लगभग 300 किलोमीटर व्यास है। वैज्ञानिकों का मानना है कि नया मिला है कि प्लूटो इस बौने ग्रह की तुलना में छह गुना चौड़ा है। बता दें कि शेपर्ड ने सौर मंडल के बाहरी रिम पर छोटे ग्रहों को खोजने के लिए एक सतत सर्वेक्षण शुरू किया है। उन्होंने कहा कि है गोब्लिन में दिलचस्पी है क्योंकि यह हमारे सौर मंडल के चार सबसे बड़े ग्रहों, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून जैसे विशाल ग्रह क्षेत्र से परे रहता है। चूंकि 2015 टीजी 387 इतनी दूर है कि मील बोलने में भी अनावश्यक हो जाता है। प्लूटो सूरज से औसतन 40 एयू दूर है। गोब्लिन 65 एयू से करीब नहीं आता है।

सूरज की एक कक्षा को पूरा करने में लगते हैं इतने साल

सूरज की एक कक्षा को पूरा करने में लगते हैं इतने साल

वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे सौर मंडल में केवल कुछ ज्ञात वस्तुओं की तुलनात्मक कक्षाएं हैं, जैसे बौने ग्रह 2012 वीपी 113 (उपनाम बिडेन) और सेदना हैं। और 2015 टीजी 387 की लापता अंडाकार कक्षा उन दो दूरस्थ वस्तुओं की तुलना में काफी दूर ले जाती है। गोब्लिन 2,300 एयू तक पहुंच जाता है, जिसे ओर्ट क्लाउड कहा जाता है। इसका मतलब यह भी है कि गोब्लिन को सूरज की एक कक्षा को पूरा करने के लिए 40,000 साल लगते हैं।

सौर मंडल से जुड़े कई राज खोल सकता है यह बौना ग्रह

सौर मंडल से जुड़े कई राज खोल सकता है यह बौना ग्रह

वैज्ञानिकों की माने तो 2015 टीजी 387 की कक्षा की पुष्टि करने के लिए मई 2018 से बार-बार अवलोकन की आवश्यकता होती रही है, क्योंकि ग्रह धीरे-धीरे चलता है। इसके बाद इस ग्रह के बारे में कुछ जानकारी हासिल हुई है और इसके लिए खगोलविद बहुत भाग्यशाली है। चूंकि 2015 टीजी 387 बहुत दूर है और यह अपनी कक्षा के 99 प्रतिशत हिस्से के साथ यात्रा करता है, ऐसे में पता लगाना बहुत ज्यादा मुश्लिक होता है। शेपर्ड ने कहा कि यह बौना ग्रह हमारे सौर मंडल को लेकर कई सारे राज खोने वाला है। लेकिन वो समय अभी बहुत दूर है।

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