Jagdeep Dhankhar: IIT, NDA, IAS में हुआ चयन लेकिन सबकुछ छोड़ बने वकील, फिर शुरू की राजनीति
नई दिल्ली, 16 जुलाई: उपराष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मियां जोरों पर हैं। जिसके तहत एनडीए ने शनिवार शाम को जगदीप धनखड़ का नाम आगे किया। वो अभी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जब से वो इस पद पर तैनात हुए हैं, तब से उनका टीएमसी और ममता बनर्जी से विवाद चल रहा। वैसे धनखड़ राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी हैं और उनको कानूनी दांवपेच की काफी जानकारी है। आइए जानते हैं उनके बारे में-
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सब कुछ छोड़ वकालत चुनी
जगदीप धनखड़ राजस्थान के झुंझुनूं के रहने वाले है। उनका जन्म 18 मई 1951 को हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उनका चयन आईआईटी के लिए हुआ। इसके बाद एनडीए और आईएएस में भी वो चुने गए, लेकिन उन्होंने वकालत को ही अपना पेशा चुना। उनको सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में गिना जाता है और वो राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

ऐसा रहा राजनीतिक करियर
वहीं राजनीतिक करियर की बात करें तो धनखड़ ने 1989 में जनता दल के टिकट से झुंझुनूं से चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड वोटों से जीते। वो केंद्रीय मंत्री भी रहे। हालांकि बाद में वो कांग्रेस में चले गए। इसके बाद उन्होंने अजमेर लोकसभा सीट से किस्मत आजमाई, लेकिन चुनाव हार गए। फिर 2003 में वो बीजेपी में शामिल हुए और उनके राजनीतिक करियर ने नई रफ्तार पकड़ी। इसके बाद वो अजमेर के किशनगढ़ से विधायक चुने गए। 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया, उस पद पर वो अभी भी बने हुए हैं।

जाटों के आरक्षण में अहम भूमिका
धनखड़ राजस्थान की जाट बिरादरी से आते हैं। उन्होंने राज्य में जाटों को आरक्षण दिलवाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने काफी वक्त तक वकालत की, ऐसे में उनको कानून की बहुत ही अच्छी जानकारी है। अब एनडीए ने उनको उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि उनको कौन-कौन सी पार्टियां समर्थन देती हैं।












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