मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त: 42 दिन में 42 नक्सलियों का समर्पण, मुख्यमंत्री बोले– देश महफूज है
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राज्य में नक्सलवाद के अंत की घोषणा की, एक समन्वित राष्ट्रीय अभियान के बाद। एमएम सी जोन में सामूहिक आत्मसमर्पण देखा गया, अभियान में 38 जवान शहीद हुए और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और विकास में तेजी लाने की प्रतिबद्धता जताई गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आज महफूज है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में जनवरी 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने के संकल्प का परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश नक्सलवाद से मुक्त हो गया है।

डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के अदम्य साहस और बलिदान के कारण बालाघाट से ‘लाल सलाम’ को 11 दिसंबर को अंतिम सलाम कर दिया गया है। यह दिन मध्यप्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। मुख्यमंत्री की वर्चुअल उपस्थिति में बालाघाट में मौजूद अंतिम दो नक्सली — दीपक उइके और रोहित — ने भी आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने बताया कि 42 दिनों में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ (एमएमसी) ज़ोन में 7 करोड़ 75 लाख के इनामी कुल 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के मार्गदर्शन में आजादी के बाद पहली बार नक्सलवाद के खिलाफ इतना व्यापक और ऐतिहासिक संयुक्त अभियान चलाया गया। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा 26 जनवरी 2026 तक नक्सलवाद की समाप्ति का अंतिम लक्ष्य निर्धारित किया गया था। नक्सलवादियों के सामने दो ही विकल्प थे—नवजीवन का अवसर या फिर संघर्ष का अंत। केंद्रीय सशस्त्र बलों और मध्यप्रदेश पुलिस के संयुक्त प्रयासों से आज प्रदेश पूरी तरह नक्सल मुक्त हो गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में 10 नक्सली मारे गए, जबकि 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो पिछले 21 वर्षों में सबसे बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश के सभी सक्रिय नक्सली कैडर समाप्त कर दिए गए हैं।
नक्सलवाद खत्म, विकास की राह खुली
डॉ. यादव ने कहा कि नक्सलवाद के खत्म होने के साथ मंडला, डिंडोरी और बालाघाट के विकास की बाधाएं दूर हो गई हैं। अब क्षेत्र विकास की राह पर और तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि माओवाद को दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा और केंद्र के नेतृत्व में विकास कार्यों को गति दी जाएगी।
शहीदों को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने नक्सल उन्मूलन अभियान में शहीद हुए 38 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को नमन किया और उनकी कुर्बानियों को याद किया। अभियान में शहादत देने वाले अधिकारी-कर्मी: मोहनलाल जखमोला, प्रेम सिंह रावत, तारकेश्वर पांडे, अमलानंद कोटवाला, जगपाल सिंह, मोतीलाल नरवरिया, रामचरण, रविंद्र नाथ द्विवेदी, देवेंद्र कुमार, गंगा प्रसाद मिश्रा, कन्हैयालाल, जागेश्वर प्रसाद पांडे, वंश बहादुर प्रसाद, करण सिंह, बंजारी लाल मार्को, श्रीकृष्ण, बेजनाथ सिंह परिहार, रमेशकुमार पांडे, राजेन्द्र प्रसाद दुबे, लल्लुलाल कोल, शिव कुमार पर्ते, बिहारी लाल श्रीवास, हनुमंत सिंह, फूलसिंह कुमरे, छन्नुलाल बिसेन, जीत सिंह टेकाम, जगदीश दवंडे, दंगल सिंह ठाकुर, रूपनारायण बंसल, मुन्नालाल बिसेन, कृष्णा राजू, अर्जुन सिंह, सेदनलाल पटले, रक्षित शुक्ला, कौशल प्रसाद चौधरी, राजेद्र प्रसाद उपाध्याय, हरिचंद्र रहांगडाले और आशीष शर्मा।
आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगा नवजीवन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरेंडर पॉलिसी के तहत पुनर्वास प्रदान किया जाएगा। सरकार मुख्यधारा में लौटने वालों को सुरक्षा सहित सभी सुविधाओं के लिए प्रतिबद्ध है।
सशस्त्र बलों और प्रशासन को बधाई
डॉ. यादव ने नक्सल मुक्त अभियान में शामिल सभी सशस्त्र बलों, पुलिस और प्रशासन को बधाई दी।
प्रमुख बिंदु
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त हुआ। • बालाघाट में अंतिम दो नक्सली दीपक उइके और रोहित ने आत्मसमर्पण किया। • एमएमसी ज़ोन में 42 दिनों में 7.75 करोड़ के इनामी 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। • 2025 में 10 नक्सली मार गिराए गए और 13 ने आत्मसमर्पण किया — 21 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि। • प्रदेश के सभी नक्सली कैडर ध्वस्त किए गए। • नक्सलवाद खत्म होने से मंडला, डिंडोरी और बालाघाट में विकास की राह सरल हुई। • 38 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों ने अभियान में शहादत दी। • आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरेंडर पॉलिसी के तहत पुनर्वास व सुरक्षा दी जाएगी। • सरकार विकास की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।












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