नवरात्रि विशेष: कैसे और कब करें मां की पूजा
अनन्त शक्ति की उपासना का महापर्व है नवरात्रि। आदि शक्ति के हर रूप की नौं दिनों तक अलग-2 रूप में विधिवत पूजन व अर्चन किया जाता है। मां दुर्गा की नौंवी शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। मां देवी का नौंवा रूप हर प्रकार की कामना को सिद्ध करने में सहायक सिद्ध होती है। नवदुर्गा व दशमहाविद्याओं में मां काली प्रमुख है।
भोले नाथ की शक्तियों में उग्र व सौम्य दो रूपों में अनके रूप धारण करने वाली दस महाविद्यायें अनन्य सिद्धियां प्रदान करने में सक्षम है। संसार की भौतिक सम्पदाओं की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए हर मनुष्य लालायित रहता है। सतकर्म, परोपकार, धर्म, कर्म का कर्तव्य और निःस्वार्थ सेवा किये बिना आदि शक्ति की कृपा संभव नहीं है। मां दुर्गा मिष्ठान की नहीं भाव की भूखी है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष नवरात्र का शुभारम्भ 25 सितम्बर से एंव समापन 03 अक्टूबर की नवमी तिथि को होगा। 25 सितम्बर के दिन हस्त नक्षत्र में ब्रहम योग होने के कारण कन्या लग्न में प्रातःकाल कलश स्थापना का योग है।
पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजे से 8:30 मिनट तक। दूसरा मूहूर्त- 9:58 मि0 से 11:22 मिनट तक।
दुर्गा शप्तशती के अध्याय के पाठों से मनोकामना पूर्ण होगी-

प्रथम अध्याय
प्रथम अध्याय का पाठ करने हर प्रकार की चिन्ता व तनाव दूर होगा।

द्वितीय अध्याय
द्वितीय अध्याय का पाठ करने से मुकद्मे, विवाद व भूमि आदि से सम्बन्धित मामलों में विजय मिलेगी।

तृतीय अध्याय
तृतीय अध्याय का पाठ करने से मां भगवती की कृपा से आपके शत्रुओं का दमन होगा।

चतुर्थ अध्याय
चतुर्थ अध्याय का पाठ करने से आपके आत्म-विश्वास व साहस में वृद्धि होगी।

पंचम अध्याय
पंचम अध्याय का पाठ करने से घर व परिवार में सुख शान्ति बनी रहती है।

षष्ठम अध्याय
षष्ठम अध्याय का पाठ करने से मन का भय, आशंका व नकारात्मक विचारों में कमी आयेगी।

सप्तम अध्याय
सप्तम अध्याय का पाठ विशेष कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है।

अष्टम अध्याय
अष्टम अध्याय का पाठ करने से पति-पत्नी का आपसी तनाव समाप्त होता है एंव मनचाहे साथी की प्राप्ति भी होती है।

नवम अध्याय
नवम अध्याय का पाठ करने से परदेश गया व्यक्ति या खोया हुआ व्यक्ति शीघ्र ही वापस लौट आता है।

दशम अध्याय
दशम अध्याय का पाठ करने से पुत्र की प्राप्ति होती है एंव मान-सम्मान में वुद्धि होती है।

ग्यारहवें अध्याय
व्यापारी वर्ग को दुर्गा शप्तशती ग्यारहवें अध्याय का पाठ करने से व्यवसाय में प्रगति होती है।

द्वादश अध्याय
जो लोग घर की कलह से परेशान है एंव किसी काम में प्रगति नहीं होती है, उन्हें द्वादश अध्याय का पाठ करने से लाभ मिलता है।

त्रियोदश अध्याय
त्रियोदश अध्याय का पाठ करने से घर का वास्तु दोष, मानसिक क्लेश, परिवार की प्रगति में आ रही बाधा दूर होती है।












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