नाक में स्प्रे से दी जाने वाली कोरोना वैक्सीन को लेकर शोध में सामने आई बड़ी बात
नई दिल्ली, 12 जुलाई। कोरोना की वैक्सीन को एक ही डोज में दिए जाने की तैयारी की जा रही है। ताजा शोध में यह बात सामने आई है कि कोरोना की सिंगल डोज कई मायनो में काफी अहम है। इस डोज को लेने के बाद घर में पाए जाने वाले चूहों में संक्रमण नहीं फैलता है। यह वैक्सीन संक्रमण को जानवरों में जाने से रोकती है, जिससे कि कोरोना जानवरों से किसी ओर तक नहीं फैलने पाता है। नई वैक्सीन को नाक के जरिए स्प्रे के तौर पर दिया जाएगा, जोकि पहले इन्फ्लुएंजा के लिए भी दिया जाता था। यह वैक्सीन पहले की वैक्सीन से अलग है, फिलहाल कोरोना की वैक्सीन इजेक्शन के जरिए दी जाती है लेकिन नई सिंगल डोज वैक्सीन नाक में स्प्रे के जरिए दी जाएगी।

अमेरिका की जॉर्जिया युनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल मैक्रे ने बताया कि मौजूदा समय में कोरोना की जो वैक्सीन उपलब्ध है वह काफी कारगर है, लेकिन दुनिया की अधिक से अधिक आबादी अभी भी वैक्सीन नहीं लगवा सकी है, लिहाजा ऐसी वैक्सीन की जरूरत है जिसे लगाना आसान हो और संक्रमण को फैलने से रोक सके। अगर कोरोना की नई स्प्रे वैक्सीन प्रभावी होती है तो यह संक्रमण को फैलने से रोक सकती है।
नाक के जरिए दी जाने वाली यह वैक्सीन म्युकोसेल पर को निशाना बनाती है, जिसके जरिए मुख्य रूप से कोरोना का संक्रमण शरीर में प्रवेश करता है और यहीं से वायरस अपना विस्तार करता है। यहां से वायरस शरीर में पहुंचकर सीधा फेफड़े और शरीर के अन्य हिस्सों को निशाना बनाता है, जिससे बीमारी और भी गंभीर और घातक हो जाती है। शोध में यह बात भी सामने आई है कि यह वैक्सीन पैराफ्लुएंजा वायरस शरीर के भीतर भेजती है जोकि कोरोना को रोकने को काम करती है।
शोध में यह बात भी सामने आई है कि इस वैक्सीन की सिर्फ एक ही डोज की आवश्यकता है, जिसे आसानी से घरेलू फ्रिज में रखा जा सकता है। इसे तीन महीने तक फ्रिज में स्टोर किया जा सकता है। चुंकि यह वैक्सीन नाक से स्प्रे के तौर पर दी जाती है लिहाजा इसे देना काफी आसान होगा, खासकर कि उन लोगों को जिन्हें सुई का डर है। प्रोफेसर पॉल ने कहा कि हमारे प्री क्लीनिक डेटा में यह बात सामने आई है कि यह वैक्सीन ना सिर्फ संक्रमण से बचाती है बल्कि इसे फैलने से भी रोकती है। यह वैक्सीन चूहों के संक्रमण और बीमारी से भी बचाती है।












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