आंकड़े कर रहे 2019 में नरेंद्र मोदी की वापसी की भविष्‍यवाणी!

नई दिल्‍ली। 2014 लोकसभा चुनाव में बंपर सीटों के साथ बीजेपी के नेतृत्‍व में केंद्र की सत्‍ता संभालने वाला एनडीए अब संशय से घिरा है। इस समय न केवल विपक्षी कांग्रेस, सपा, बसपा, टीएमसी 2019 में एनडीए की जीत की संभावनाओं को सिरे से नकार रहे हैं, बल्कि खुद बीजेपी के नेताओं में सुगबुगाहट है कि अगले आम चुनाव में क्‍या होगा? ये वही बीजेपी और एनडीए है, जिसके बारे में 2017 तक यह कहा जा रहा था कि कांग्रेस का 2019 में तो कुछ होने वाला नहीं, इसलिए उसे 2024 की तैयारी करनी चाहिए। तब शायद किसी को पता नहीं था कि 2018 में कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ के चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए बुरी खबर लेकर आएंगे। कर्नाटक में बीजेपी बहुमत के बेहद करीब पहुंचकर सबसे बड़ी पार्टी बनी पर बीएस येदुरप्‍पा जरूरी समर्थन प्राप्‍त नहीं कर सके। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन दे दिया और कर्नाटक में अब गैर बीजेपी सरकार सरकार चल रही है। मध्‍य प्रदेश में करीबी मुकाबले में कांग्रेस ने बाजी मारी, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में भी वह जीत गई। ये हार बीजेपी की 2019 की संभावनाओं पर कुठाराघात कर गई और आज हालत यह है कि चारों तरफ संशय के बादल छाए हुए हैं। लेकिन आंकड़े अब भी नरेंद्र मोदी के ही पक्ष में हैं। हालांकि, इस समय यह कहना बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन 'मोदी की वापसी' की भविष्‍यवाणी हवा-हवाई नहीं है। इसके पीछे ठोस कारण हैं, 'पोल ऑफ पोल्‍स' का गणित है, मुद्दों पर पकड़ और मोदी मैजिक का विश्‍लेषण है।

'पोल ऑफ पोल्‍स' में अब भी नरेंद्र मोदी की सबसे बड़े नेता

'पोल ऑफ पोल्‍स' में अब भी नरेंद्र मोदी की सबसे बड़े नेता

'पोल ऑफ पोल्‍स' यानी चुनावी सर्वेक्षणों आधार पर निष्‍कर्ष निकालें तो अब भी कांग्रेस या तथाकथित महागठबंधन का कोई भी दल बीजेपी के नेतृत्‍व वाले एनडीए के आसपास नहीं फटकता। 2019 लोकसभा चुनाव में एनडीए का प्रदर्शन किस राज्‍य में कैसा रहने की संभावना है? 'पोल ऑफ पोल्‍स' से समझते हैं। हाल ही में कई राज्‍यों के सर्वेक्षण सामने आए हैं, लेकिन हमने सर्वेक्षण से भी कम अनुमानित सीटों की संख्‍या एनडीए के लिए रखी है, जिससे कि यह अंदाजा लगे कि 2019 में एनडीए को कम से कम कितनी सीटें मिल सकती हैं। पिछले कुछ समय में सी वोटर, इंडिया टीवी सीएनएक्‍स जैसे कई सर्वे सामने आए, ये आंकड़े उन्‍हीं को कम करके लिए गए हैं, जिससे कि पता चले कि अगर कम से कम सीटें भी आईं तो क्‍या स्थिति बनेगी।

2019 में एनडीए की जीत प्रबल संभावना की ओर इशारा करते हैं ये आंकड़े

2019 में एनडीए की जीत प्रबल संभावना की ओर इशारा करते हैं ये आंकड़े

उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से बीजेपी को 2019 में कम से कम 35 सीटों पर जीत प्राप्‍त हो सकती है। इसी प्रकार से महाराष्‍ट्र की 48 में से अगर शिवसेना के बगैर एनडीए चुनाव में उतरता है तो कम से कम 16 सीटें अवश्‍य जीतेगा। पश्चिम बंगाल में मोदी लहर का जादू बढ़ता दिख रहा है, इसके बाद भी 42 में से केवल 5 सीटें अनुमान के तौर पर बीजेपी के खाते में मानकर चलते हैं। आंध्र प्रदेश में 0, तमिलनाडु में 0, केरल में 0, बिहार की 40 में से एनडीए को 30, मध्य प्रदेश की 29 में से बीजेपी को कम से कम 20, गुजरात की 26 लोकसभा सीटों में से कम से कम 20, राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से 15, नॉर्थ-ईस्‍ट की 25 सीट में से 20, छत्तीसगढ़ 11 में से बीजेपी 5, गोवा की 02 सीटों में से 01, हरियाणा की 10 में से 05, हिमाचल की प्रदेश 4 में से 2, जम्मू कश्मीर की 6 में 2, झारखंड की 14 में से 8, कर्नाटक की 26 में से 15, ओडिशा की 21 में से कम से कम 05, पंजाब की 13 में से एनडीए को 5, उत्तराखंड की 5 में से बीजेपी को कम से कम 3 और 13 केंद्र शासित सीटों मे से बीजेपी को 7 मिल सकती हैं। इस हिसाब से कम से कम सीटों के अनुमान से भी एनडीए का आंकड़ा 221 बैठता है। यह बात यही है कि चुनाव पूर्व कई सहयोगी एनडीए को छोड़ गए हैं, लेकिन चुनाव बाद एनडीए अगर सबसे बड़ा खेमा बना तो ओडिशा से बीजू पटनायक, तेलंगाना से केसीआर और तमिलनाडु से रजनीकांत या अन्‍य एक दल का समर्थन एनडीए को प्राप्‍त हो सकता है।

100 सीटों के नीचे ही रहेगी कांग्रेस

100 सीटों के नीचे ही रहेगी कांग्रेस

अभी तक सामने आए विभिन्‍न सर्वेक्षणों के आधार पर कहा जा सकता है कि 2019 में कांग्रेस मजबूत तो होगी, लेकिन उसकी सीटें 100 के नीचे ही रहेंगी। अब देखना होगा कि 2019 का परिणाम इन्‍हीं सर्वेक्षणों के इर्द-गिर्द घूमता या परिणाम चौंकाने वाले आते हैं। संभव है कि मतदाता पूरी तरह एनडीए के पक्ष में चला जाए। इस बात की भी पूरी संभावना है कि वोटर कांग्रेस को पूर्ण बहुमत दे दे, लेकिन ये दोनों संभावनाएं हैं, जमीनी हकीकत के आधार पर देखें तो एनडीए ही सबसे बड़ा फ्रंट बनकर 2019 में उभरेगा, सीटों की संख्‍या बहुमत के पार जाती है, आसपास जाती है या काफी रह जाती है, इन सवालों का जवाब तो 2019 में ही मिलेगा।

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