नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल के 10 अहम प्वाइंट्स
नई दिल्ली। चीन के विदेश मंत्री वांग याई भारत में हैं और वह सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। उनसे मिलने से पहले ही नरेंद्र मोदी ने उस राज के बारे में बताया जिससे कि हम अपने पड़ोसी मुल्क चीन को आर्थिक तरक्की में पीछे छोड़ सकते हैं।
नरेंद्र मोदी रविवार को एक पुस्तक 'गेटिंग इंडिया बैक ऑन ट्रैक' को लांच करते समय कहा, 'अगर देश को तरक्की के रास्ते पर वापस लाना है और चीन के साथ प्रतियोगिता करना है तो हमें स्किल, स्केल और स्पीड पर ध्यान देना होगा।'
'गेटिंग इंडिया बैक ऑन ट्रैक,' बिबेक देबरॉय और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एश्ले टेलिस ने लिखा है। इस प्रोग्राम में नरेंद्र मोदी ने 'कलर रेवॉल्यूशन' पर ध्यान देने को भी कहा।
बजट सत्र के शुरू होने के बीच ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह सारी बातें कहीं न कहीं इस ओर भी इशारा करती हैं कि उनकी सरकार का बजट के दौरान क्या एजेंडा रहने वाला है।
आगे की स्लाइड्स में जानिए उन कुछ खास बातों के बारे में जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की तरक्की के लिए सबसे अहम करार दी हैं और जिन पर सावधानी से काम करने की बात उन्होंने कही है।

35 वर्ष से कम की 65 प्रतिशत आबादी
नरेंद्र मोदी ने रविवार को इस बात पर खासा जोर दिया कि भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम है। ऐसे में देश को इस युवा आबादी का फायदा उठाने की दिशा में काम करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान स्किल डेवलपमेंट को प्राथमिकता दिए जाने की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को स्किल डेवलपमेंट वाला देश बनाना होगा।

अगर करनी है चीन से प्रतियोगिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि अगर भारत को चीन से प्रतिस्पर्धा करनी है तो स्किल, स्केल और स्पीड पर ध्यान देना होगा। मोदी ने कहा जब तक हम इन तीन बातों पर ध्यान नहीं देंगे तब तक चीन से आगे निकलने की बात सोचना भी बेमानी है।

तैयार हों ऐसे शिक्षक कि दूसरे देश भी कर उठें वाह-वाह
इस कार्यक्रम के दौरान नरेंद्र मोदी ने टीचिंग, नर्सिंग और अर्धचिकित्सकीय स्टाफ की सही ट्रेनिंग पर ध्यान देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कहा कि आज देश में अच्छे अध्यापकों की बहुत जरूरत है लेकिन ऐसे अध्यापक मिलते बहुत कम हैं। मोदी के मुताबिक क्या भारत ऐसे अच्छे अध्यापकों का निर्यातक बन सकता है जो दुनिया भर के लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकें।

मोदी ने बताई रंगों की अहमियत
कार्यक्रम के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों का जिक्र भी किया। उन्होंने इनकी तुलना देश के तीन ऐसे क्षेत्रों से की जिनके विकास पर भारत को सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

देश में दूसरी हरित क्रांति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में हरे रंग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत को दूसरी हरित क्रांति लानी है। इसके लिए एग्रीकल्चर प्रोडक्शन , कीमतें, एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी और डी-सेंट्रलाइज्ड स्टोरेज पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही उन्होंने यहां पर माइक्रो इरीगेशन का जिक्र भी इस कार्यक्रम के दौरान की।

देश में बढ़ाया जाए मिल्क प्रोडक्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगे के सफेद रंग को उन्होंने श्वेत क्रांति से जोड़ा। उन्होंने हुए कहा कि इसके लिए दूध का प्रोडक्शन बढाना होगा। इसके साथ ही उन्होंने देश में मौजूद पशुधन को बेहतर रखने के लिए उनके बेहतर स्वास्थ्य पर जोर दिया और कहा कि उनके स्वास्थ्य के लिए देश में एक सही सिस्टम का होना बहुत ही जरूरी है।

ऊर्जा से आएगी केसरिया क्रांति
नरेंद्र मोदी मोदी ने तिरंगे के केसरिया रंग को एनर्जी सिक्योरिटी से जोड़ते हुए कहा कि केसरिया ऊर्जा का प्रतीक है। हमें सैफरॉन रेवॉल्यूशन यानी केसरिया क्रांति की जरूरत है। उन्होंने इस संबंध में देश की बढ़ती एनर्जी डिमांड को पूरा करने के लिए सोलर एनर्जी के साथ ही एनर्जी के बाकी स्त्रोतों पर ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मीडिल ईस्ट देशों पर अपनी निर्भरता को खत्म कर सकता है तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं।

तिरंगे का अशोक चक्र ब्लू रेवॉल्यूशन
नरेंद्र मोदी ने तिरंगे में मौजूद अशोक च्रक की नीली रेखाओं का जिक्र करते हुए उन्हें मत्स्य पालन उद्योग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि देश में ब्लू रेवॉल्यूशन यानी नीली क्रांति के जरिए सजावटी मछली सहित मछली पालन उद्योग का विकास किया जाना चाहिए।

पर्यावरण बचाने पर जोर
नरेंद्र मोदी ने कहा कि वायु मंडल का तापमान बढने और जलवायु परिवर्तन की समस्या काफी गंभीर है लेकिन हम इसे पश्चिम के नजरिए से देखते हैं। मोदी ने कहा कि भारत वह सभ्यता है जिसमें नदियों को मां माना गया है और ऐसी सभ्यता को पर्यावरण संरक्षण के विषय में पश्चिमी सोच से सीख लेने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।

देश में 'इंटलैक्चुअल मंथन' की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक हम शहरी केंद्रो को सिर्फ बोझ और चुनौती के तौर पर ही देखते हैं न कि वहां पर मौजूद मौकों के तौर पर। मोदी ने कहा विकास के बाद भी हम उस पर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे में देश में एक 'इंटलैक्चुअल मंथन' की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को हाईवे, रोड्स और पोर्ट्स से अलग हटकर इंफ्रांस्ट्रक्चर के बारे में बात करनी होगी। ऐसे नए शहर विकसित करने होंगे जहां पर सिर्फ हाइवे नहीं आईवेज हों।
देखें वीडियो
क्लिक करें इस वीडियो पर और जाने क्या कहा नरेंद्र मोदी ने कैसे होगा देश का विकास।












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