‘50 साल बाद गांधी–मोदी की होगी साथ-साथ तुलना’, किसने कही ये बात? प्रधानमंत्री को लेकर ये दावा हैरान करने वाला
Narendra Modi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अक्सर सियासत, नीतियों और फैसलों पर चर्चा होती रहती है, लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र बना है एक ऐसा बयान, जिसने इतिहास और भविष्य को एक ही फ्रेम में ला खड़ा किया है। यह बयान किसी राजनेता ने नहीं, बल्कि देश के जाने-माने वकील और लेखक बर्जिस देसाई ने दिया है। उन्होंने कहा है कि 'आने वाले 50 सालों में महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना एक साथ की जाएगी।' यह बात सामने आते ही राजनीतिक और बौद्धिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।
बर्जिस देसाई ने यह बात एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कही। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नरेंद्र मोदी एक सामान्य राजनेता नहीं हैं। उनके मुताबिक महात्मा गांधी एक ऐसे युग पुरुष थे, जो सदी में एक बार जन्म लेते हैं। गांधी जी को 1947 और आजादी के संघर्ष के लिए याद किया जाता है, जबकि मोदी जी को आने वाले समय में भारत के निर्माण और उसे वैश्विक महाशक्ति बनाने की प्रक्रिया के लिए जाना जाएगा।

बर्जिस देसाई का कहना है कि जब भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, तब नरेंद्र मोदी के फैसलों और नेतृत्व की तुलना स्वाभाविक रूप से गांधी जी के योगदान से की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी को राष्ट्रपिता कहा गया, तो मोदी को भविष्य में राष्ट्र निर्माता के रूप में देखा जाएगा।
बर्जिस देसाई ने क्या कहा? पढ़िए पूरा बयान
ABP न्यूज को दिए इंटरव्यू में बर्जिस देसाई ने कहा,
''मोदी और गांधी की तुलना आने वाले 50 सालों में एक साथ की जाएगी। मोदी जी एक सामान्य राजनेता नहीं हैं, महात्मा गांधी एक नेता तो नहीं थे लेकिन एक युग पुरुष थे, जो सदी में एक बार आता है। लेकिन आने वाले 50 सालों के बाद गांधी और मोदी की तुलना साथ-साथ की जाएगी। जो महात्मा गांधी राष्ट्रपिता थे, तो मोदी जी राष्ट्र निर्माता हैं, अगर 1947 के लिए गांधी जी को याद किया जाएगा तो 2027 के बाद 20-22 साल के बाद, जब भारत विकसित हो जाएगा, एक महाशक्ति बन जाएगा तो सेकंड लार्जेस्ट इकोनॉमिक के तौर पर आएगी, तो ये जो कार्य मोदी जी ने किया है, और जो कर रहे हैं और करेंगे, तो इसकी तुलना शायद मेरे ख्याल में मोदी जी की होगी।''
उन्होंने आगे कहा,
''गांधी जी ने, स्वतंत्रता दिलाई लेकिन मोदी जी ने जो सामुहिक चेतना को, सर को ऊपर लाए हैं, और जो करके दिखाया है कि भारत एक महाराष्ट्र बन सकता है, तो वो 1947 के लिए गांधी और 2047 के लिए मोदी जाने जाएंगे।''

'मोदीज मिशन' किताब ने फिर बढ़ाई चर्चा
इस बयान के पीछे एक अहम वजह है बर्जिस देसाई की हाल ही में प्रकाशित किताब 'Modi's Mission'। रूपा पब्लिकेशन्स से छपी इस किताब का विमोचन 24 अक्टूबर 2025 को हुआ था। किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वडनगर के साधारण बचपन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक के असाधारण सफर को विस्तार से बताया गया है।
यह किताब उन आरोपों और दावों पर भी सवाल उठाती है, जिनके जरिए मोदी सरकार को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती रही है। लेखक ने इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण, अनुच्छेद 370 को हटाने, पारदर्शी शासन और परिणाम आधारित प्रशासन जैसे फैसलों की पृष्ठभूमि और सोच को समझाने की कोशिश की है।
गांधी और मोदी की तुलना पर देसाई की दलील
बर्जिस देसाई का मानना है कि गांधी जी ने देश को आजादी दिलाई, जबकि मोदी जी ने देश की सामूहिक चेतना को जगाया। उनके अनुसार मोदी के नेतृत्व में भारत ने आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत की है। देसाई ने यहां तक कहा कि भारत अब खुद को कमजोर राष्ट्र की तरह नहीं देखता, बल्कि एक सक्षम और निर्णायक शक्ति के रूप में आगे बढ़ रहा है। उनके शब्दों में, 1947 गांधी का साल था और 2047 मोदी का साल होगा। यही वजह है कि भविष्य में दोनों की तुलना एक साथ की जाएगी।
पीएम मोदी से मुलाकात भी बनी सुर्खी
नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बर्जिस देसाई की मुलाकात भी काफी चर्चा में रही। देसाई ने प्रधानमंत्री को अपनी किताब भेंट की। इस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें प्रसिद्ध वकील बर्जिस देसाई से मिलकर खुशी हुई और उनकी किताब प्राप्त कर प्रसन्नता हुई। जवाब में देसाई ने भी इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया।
कौन हैं बर्जिस देसाई (who is Berjis Desai)
🔹 बर्जिस देसाई मुंबई स्थित वरिष्ठ वकील और लेखक हैं। वह एक समय गुजरात के एक प्रमुख दैनिक में पत्रकार भी रह चुके हैं। उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से प्रथम श्रेणी में स्नातक किया और बॉम्बे यूनिवर्सिटी से एलएलबी में टॉप किया। इसके बाद उन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए रोटरी इंटरनेशनल स्कॉलरशिप मिली।
🔹 करीब 45 साल के कानूनी करियर में वह देश की जानी-मानी लॉ फर्म जे सागर एसोसिएट्स के मैनेजिंग और सीनियर पार्टनर रहे। रिटायरमेंट के बाद वह निजी कानूनी सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं और कई बड़ी कंपनियों के बोर्ड में निदेशक भी हैं।
🔹 लेखन के क्षेत्र में भी देसाई की अलग पहचान है। पारसी समुदाय पर लिखी उनकी किताबें काफी चर्चित रही हैं। उपन्यास और क्राइम थ्रिलर लिखने के साथ-साथ वह कॉलमिस्ट भी हैं।
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