जापान के लोगों का दिल जीत लिया नरेंद्र मोदी ने
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला)। किसी ने ठीक ही कहा कि जापान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जो रुप दिखा है उस तरह की छाप पहले किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नहीं छोड़ी। मोदी ने वहां प्रधानमंत्री के साथियों-सहयोगियों, बड़ी कंपनीज के सीईओज से लेकर आम जन सबको प्रभावित किया।

वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी के रुप में भारत राष्ट्र को यह भान हुआ कि कोई हमारा नेता विश्व पटल पर देश संस्कृति, सोच, शक्ति के अनुरुप भूमिका निभा रहा है।
मंदिर के दर्शन
क्योतो में तोजो मंदिर के दर्शन करते मोदी, जापान के प्रधामंत्री शिंजो एबे के साथ मछलियों को खाना खिलाते मोदी, क्योतो के मेयर के साथ वहां के विकास को समझते और उसी तरह विरासत और पर्यावरण को बचाते हुए अपने सांस्कृतिक शहरों के लिए विकास में मदद मांगते और स्वीकृति पाते मोदी, मंदिर के पुजारी को आप मोरी और मैं मोदी कहकर उसका दिल जीतते मोदी, बच्चे का कान पकड़कर तस्वीर खींचवाते मोदी, विद्यालय में बच्चों के साथ बांसुरी बजाते मोदी, वहां की शिक्षा में अनुशासन, नैतिकता के तरीकों को सीखते और शि़क्षकों को भारत आकर शिक्षा देने के लिए आमंत्रित करते मोदी, शानदार तरीके से ड्रम बजाते मोदी, एक भारतीय प्रमुखता वाले विद्यालय में वंदे मातरम पर पहले गुनगुनाते और तालियों से ताल मिलाते मोदी.....ये सब रुप दुनिया के प्रमुख नेताओं ने देखा और मोदी की एक अमिट पहचान बनी।
मुलाकात नेताजी के साथी से
बोशक उनका जापान में नेता जी सुभाषचन्द्र बोस के साथी रहे 99 वर्षीय साईचिरो मिसुमी से मिलना भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के राष्ट्रीय तथा विश्व समुदाय के हित के अनुरुप काम की ओर अग्रसर होने का जो विचार और व्यवहार मोदी ने प्रस्तुत किया वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई शुरुआत है।
और सबमें एक विशिष्ट पहलू यह कि सारी बातें हिन्दी में। यह सोच कि राजनय केवल अंग्रेजी में ही हो सकता, ध्वस्त हुआ है। जो हमारा एजेंडा था सारे पूरे हुए बिना अंग्रेजी बोले हुए......जो प्रभाव पड़ना था पड़ा हिन्दी बोलकर ही।












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