सिर्फ सत्ता नहीं, कामकाज का मॉडल भी पलट देंगे मोदी

एक्जिट पोल से उत्साहित भाजपा नेताओं के बीच दबी जुबान मंत्रिमंडल व उनकी अपनी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अलग-अलग समीकरणों से हर कोई खुद को इसके योग्य मान रहा है। उन नेताओं की आशा का बड़ा आधार यह है कि पार्टी बड़ी संख्या लेकर आएगी, लिहाजा दूसरे दलों को मोलभाव करने का बड़ा मौका नहीं मिलेगा।
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ऐसे में भाजपा नेताओं को सरकार में जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इनमें से कइयों के सपने टूट सकते हैं। मोदी शायद जंबो कैबिनेट की बजाय कामकाज पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। संभव है कि केंद्र सरकार के लिए तय सीमा से कुछ कम ही मंत्री बनाए जाएं। कुछ मंत्रालयों को जोड़कर आसानी से मंत्रियों की सीमा कम की जा सकती है। मसलन, पंचायत मंत्रालय को फिर से ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ किया जा सकता है।
पहले भी पंचायत मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन काम करता आ रहा था, लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) काल में इसे दो भागों में बांटकर मंत्रियों के लिए स्थान बनाया गया था। इसी प्रकार पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय को फिर से एक मंत्री के अधीन किया जा सकता है। कोल व माइनिंग भी इकट्ठा हो जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं।
वर्तमान सरकार में एक-एक मंत्रालय में तीन-तीन राज्यमंत्री की परंपरा रही है, जबकि ऐसे भी कई छोटे मंत्रालय बने जिसे अलग-अलग बांटकर इकट्ठा एक मंत्री के अधीन किया गया है। संप्रग सरकार में 75 के आसपास मंत्री हैं। माना जा रहा है कि मोदी कैबिनेट में यह संख्या काफी कम होगी। दरअसल, मोदी की सोच कुछ ऐसी ही रही है। प्रचार के दौरान मोदी यह संकेत देते रहे हैं कि भारी-भरकम सरकार की बजाय प्रभावी सरकार जरूरी है।
संभव है कि कुछ खास मंत्रालयों में कैबिनेट मंत्री के अधीन उस क्षेत्र से संबंधित विशेषज्ञों को विशेष जिम्मेदारी देकर राज्यमंत्रियों का स्थान रिक्त किया जाए। हां, कामकाज की निगरानी जरूर होगी ताकि समयबद्ध तौर पर काम हो सके। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय राजनीति में आने के साथ ही मोदी हर मोर्चे पर अपने मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस की छाप छोड़ना चाहेंगे। फिलहाल पदों को लेकर माथापच्ची जारी है व किसी को भी नाराज कर पार्टी आगे कदम नहीं बढ़ाना चाहती।












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