भाजपा को 337 सीटों का स्‍पष्‍ट बहुमत, 'अच्‍छे दिनों' का ऐतिहासिक आगाज़

narendra-modi
नई दिल्‍ली। 16वीं लोकसभा के लिए चली 'लहर' एक नए मुकाम पर आकर रुकी है। चुनाव 2014 ऐतिहासिक नतीजे लेकर आए हैं। 30 साल में यह पहला ऐसा मौका है, जब किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। यह ऐसा भी पहला ही अवसर होगा, जब कांग्रेस के अलावा किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला। 337 सीटों क साथ यह भाजपा की अब तक की शानदार जीत है।

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पिछली बार वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस ने शानदार बहुमत प्राप्त किया था। अब लोकसभा चुनाव 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हाल में ही 543 सीटों के लिए जारी मतगणना में मिल रहे रुझानों में 278 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थे जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार 333 सीटों पर आगे चल रहे थे। अज तस्‍वीर एकदम साफ हो चुकी है।

शुक्रवार को सुबह आठ बजे शुरू हुई मतगणना में भारतीय जनता पार्टी को शुरू से बढ़त मिलती दिखाई दे रही थी, लेकिन कुछ देर पहले उसके खुद के प्रत्याशी ही लोकसभा में बहुमत के लिए आवश्यक सीटों से ज़्यादा 278 पर आगे चल रहे थे, और बीजेपी को 337 सीटें मिल गईं हैं, जो किसी भी विरोधी को आंखें दिखाने क लिए काफी हैं।

मां-बेटे ने ली हार की जिम्‍मेदारी-

सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष होने के नाते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की अब तक की सबसे बुरी पराजय की जिम्मेदारी स्वीकारते हुए आज स्पष्ट किया कि पार्टी सामाजिक सदभाव और राष्ट्रहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी। कांग्रेस मुख्यालय पर मीडिया के सामने आये मां-बेटे ने किसी सवाल का जवाब तो नहीं दिया लेकिन नयी सरकार को बधाई दी। राहुल ने कहा कि भाजपा को जनादेश मिला है। मैं उन्हें बधाई देता हूं, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनावों में खराब प्रदर्शन किया है और पार्टी को इस बारे में सोचने की जरूरत है।

राहुल ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष के रूप में पूरी विनम्रता से मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं। सोनिया ने कहा कि जनादेश हमारे खिलाफ है और मैं इस फैसले को विनम्रता से स्वीकारती हूं, कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते मैं इसकी जिम्मेदारी लेती हूं। नई सरकार को बधाई देते हुए सोनिया ने उम्मीद जतायी कि वह सामाजिक एकता और राष्ट्रहित से समझौता नहीं करेगी। मोदी ने ताबड़तोड़ रैलियां कर वडोदरा और अहमदाबाद में जनसमर्थन का सही हिसाब चुकाने की कसमें खाईं।

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