Nagamangala Violence: गणेश विसर्जन के दौरान हुई हिंसा को लेकर पुलिस इंस्पेक्टर निलंबित, 3 गिरफ्तार

Nagamangala Violence: कर्नाटक के मंड्या जिले के नागमंगला में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। एक पुलिस इंस्पेक्टर को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है, जबकि इस हिंसा के सिलसिले में तीन और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह हिंसा बुधवार की रात को हुई, जिसमें दो गुटों के बीच टकराव के बाद भीड़ ने दुकानों और वाहनों को निशाना बनाया, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। हालांकि, शुक्रवार तक स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन एहतियातन पुलिस बल की तैनाती की गई है।

Nagamangala Violence

निलंबन और जांच की प्रगति
गुरुवार शाम को नागमंगला पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर अशोक कुमार को निलंबित कर दिया गया। मंड्या पुलिस अधीक्षक मल्लिकार्जुन बलदंडी के अनुसार, कुमार ने जुलूस का निर्धारित मार्ग बदल दिया था, जिसके कारण यह हिंसा भड़की। इस लापरवाही के कारण उन्हें ड्यूटी से निलंबित किया गया।

हिंसा की गंभीरता और गिरफ्तारियां
अब तक इस मामले में 55 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस ने हिंसा के संबंध में 18 एफआईआर दर्ज की हैं और 52 आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में गैरकानूनी तरीके से एकत्रित होना, हत्या का प्रयास, लोक सेवकों को बाधा डालना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकार का रुख
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने पर सरकार विचार कर सकती है।

परमेश्वर ने विपक्षी दलों पर घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्षी नेता एचडी कुमारस्वामीऔर प्रह्लाद जोशी ने दावा किया कि यह हिंसा पूर्व नियोजित थी और पर्याप्त सुरक्षा उपाय न किए जाने के कारण हालात बेकाबू हो गए। भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने भी इस घटना को ऐतिहासिक मुद्दों से जोड़कर कांग्रेस सरकार की आलोचना की।

हिंसा का घटनाक्रम
हिंसा उस समय शुरू हुई जब गणेश प्रतिमा का जुलूस बद्री कोप्पलू गांव से पूजा स्थल की ओर जा रहा था। इस दौरान, दो गुटों के बीच बहस छिड़ गई, जो बाद में पत्थरबाजी और आगजनी में बदल गई। कुछ दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस घटना में दो पुलिसकर्मियों समेत कई लोग मामूली रूप से घायल हुए।

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