'SC को मान्यता नहीं देनी चाहिए, ये भारतीय मूल्यों के अनुरूप नहीं', समलैंगिक विवाह पर मौलाना साजिद रशीदी
Same Sex Marriage: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने समलैंगिक विवाह मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार कोसमलैंगिक विवाह की अनुमति नहीं दी है। वहीं अब इस मामले पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना साजिद रशीदी की भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया आई है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि समलैंगिक विवाह को लेकर शीर्ष अदालत से आग्रह किया गया है कि ऐसी शादियों को मान्यता ना दी जाए और इसके बजाय उन्हें "अपराध" माना जाए।

मंगलवार को एएनआई से बात करते हुए मौलाना रशीदी ने कहा कि समलैंगिक विवाह भारत की संस्कृति के अनुरूप नहीं है और वास्तव में, पश्चिम से उधार ली गई एक प्रथा है।
उन्होंने कहा कि "यह प्रथा भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है और वास्तव में पश्चिम से उधार लिया गया एक विचार है। यूरोपीय और पश्चिम इन चीजों के बारे में खुले हैं, लेकिन भारत में ऐसी प्रथाओं को कभी भी प्रोत्साहित या अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
मुस्लिम धर्मगुरु ने बताया, "हमारे समय-सम्मानित मूल्यों और सामाजिक परंपराओं में निहित हैं। सुप्रीम कोर्ट को मामले में अपना अंतिम फैसला देने से पहले हमारे मूल मूल्यों और मान्यताओं पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए।"
बता दें कि मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारत में LGBTQIA+ समुदाय को वैवाहिक समानता का अधिकार देने से इनकार कर दिया। समलैंगिक विवाह मामला पर CJI चंद्रचूड़ ने कहा, "शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत द्वारा निर्देश जारी करने के रास्ते में नहीं आ सकता। अदालत कानून नहीं बना सकती बल्कि केवल उसकी व्याख्या कर सकती है और उसे प्रभावी बना सकती है।"












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