#Mumbaiterrorattack: कसाब की पैरवी करने वाले वकीलों को आजतक नहीं मिली फीस, जानिए कितना है बकाया

नई दिल्ली। मुंबई हमले में जिस तरह से कई लोगों को आतंकियों ने गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया उसके बाद इस हमले में आतंकी अजमल कसाब को पुलिस ने जिंदा गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद हर किसी के भीतर आक्रोश था और कसाब को लोग फांसी दिए जाने की मांग कर हे थे। ऐसे माहौल में जब इस मामले की सुनवाई कोर्ट में शूरू हुई तो कोई भी वकील कसाब की पैरवी करने के लिए तैयार नहीं था, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर दो वकीलों को कसाब की पैरवी करने के लिए नियुक्त किया गया।

कोर्ट ने नियुक्त किया था

कोर्ट ने नियुक्त किया था

बॉम्बे हाई कोर्ट ने दो वकीलों को कसाब की पैरवी करने के लिए नियुक्त किया था, हालांकि इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई के बाद कसाब को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उसे फांसी दे दी गई थी। लेकिन घटना के दस साल बाद भी आजतक उन दोनों वकीलों को कसाब की कोर्ट में पैरवी की फीस नहीं मिली है। कोर्ट ने अमीन सोलर और फरहाना शाह को कसाब का वकील नियुक्त किया था। इन दोनों को बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएन पटेल ने नियुक्त किया था।

कसाब चाहता था अपनी पैरवी

कसाब चाहता था अपनी पैरवी

कसाब ने इच्छा जाहिर की थी कि वह कोर्ट के फैसले को चुनौती देना चाहता है, जिसके बाद इस बाबत एक अधिसूचना 8 जून 2010 को जारी की गई थी और वकीलों की नियुक्त किया गया था। इन वकीलों को उतनी ही फीस मिलनी थी, जितनी फीस अभियोजन पक्ष के वकीलों को मिलनी थी। आपको बता दें कि अगर किसी भी आरोपी के पास कोर्ट में उसकी पैरवी के लिए वकील नहीं है तो कोर्ट की परंपरा के अनुसार कोर्ट आरोपी की पैरवी के लिए वकील की नियुक्ति करती है।

अभी भी है इंतजार

अभी भी है इंतजार

कसाब को फांसी दिए जाने की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था, जिसके बाद पुणे की यरवदा जेल में कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई थी। दोनों वकील जिन्हें कसाब के लिए नियुक्त किया गया था का कहना है कि उन्हें आपात परिस्थिति में हर रोज 11-5 बजे के बीच होने वाली सुनवाई में पेश होना था। सोलकर का कहना है कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि आखिर क्यों राज्य सरकार ने हमारी फीस नहीं दी है, अब तो इस फैसले को सात साल हो गए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी, लेकिन अभी भी हम फीस का इंतजार कर रहे हैं।

कितनी मिलनी है फीस

कितनी मिलनी है फीस

सोलकर ने कहा कि हम सिर्फ उसी की मांग कर रहे हैं जो कानूनी रूप से हमे मिलना चाहिए, कानून कहता है कि हर आरोपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार है, और उसकी पैरवी होनी चाहिए, इसी वजह से हमे कसाब का बचाव करने के लिए नियुक्त किया गया था। ऐसे में हमारी फीस को दिए जाने में क्यों देरी की जा रही है। हालांकि कितनी फीस दी जानी है इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन सूत्रों की माने तो यह फीस तकरीबन 1500-200 रुपए प्रति दिन है।

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