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IAS सृष्टि देशमुख के पति और खंडवा कलेक्टर विवादों में, नेशनल अवार्ड के पीछे फर्जी आंकड़ों का क्या है पूरा खेल?

MP IAS Officers Controversy: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में इन दिनों दो युवा आईएएस अधिकारी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। मामला जल संरक्षण के लिए मिले एक प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय जल पुरस्कार' से जुड़ा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ये दोनों IAS हैं खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा।

विवादों में घिरे IAS नागार्जुन UPSC टॉपर श्रुति देशमुख में पति हैं। एक्स पर कुछ यूजर्स ने दावा किया है कि इन अधिकारियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा जनरेट की गई फर्जी तस्वीरों और भ्रामक आंकड़ों के सहारे यह सम्मान हासिल किया।

MP IAS Officers Controversy

हालांकि, इन दावों के वायरल होते ही खंडवा जिला प्रशासन ने सामने आकर पूरी स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन का कहना है कि पुरस्कार केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कड़े सत्यापन और फील्ड चेकिंग के बाद दिया गया है। ऐसे में यह पूरा मामला सोशल मीडिया बनाम आधिकारिक तथ्यों की जंग में तब्दील हो गया है।

राष्ट्रीय जल पुरस्कार में दूसरा स्थान

17 नवंबर 2025 को खंडवा के जनसंपर्क विभाग (PRO) ने घोषणा की थी कि नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में खंडवा जिले ने परचम लहराया है। 18 नवंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में खंडवा की कावेश्वर पंचायत को द्वितीय पुरस्कार दिया गया।

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इसके साथ ही, भारत सरकार के 'कैच द रेन' अभियान के तहत 'जल संचय, जनभागीदारी' पहल में खंडवा जिला पूरे देश में पहले स्थान पर रहा। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए जिले को 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पुरस्कार राशि भी दी गई। कलेक्टर ऋषव गुप्ता और सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा ने इस गौरवशाली क्षण का प्रतिनिधित्व किया था। जिसके बाद ये दावे किए जाने लगे कि जिन तस्वीरों के जरिए काम पूरा होने का प्रमाण दिया गया है उनमें से कुछ फोटो AI से बनवाई गई है। ये भी कहा गया कि फर्जी फोटो दिखा कर दोनों IAS ऑफिसर्स ने अवार्ड ले लिया।

सोशल मीडिया पर आरोपों का तूफान

विवाद की शुरुआत तब हुई जब रवि मिश्रा नामक एक यूजर सहित कई अन्य प्रोफाइल्स ने एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि तस्वीरों पर AI का वॉटरमार्क मौजूद है। आरोपों के अनुसार:

  • अधिकारियों ने पोर्टल पर अपलोड करने के लिए AI के माध्यम से फर्जी तस्वीरें बनाईं।
  • खेतों में बने छोटे गड्ढों को कुएं बताकर आंकड़ों में हेराफेरी की गई।
  • पुरस्कार पाने के लिए जमीनी हकीकत के बजाय 'डिजिटल इंजीनियरिंग' का सहारा लिया गया।
  • ये पोस्ट 27 दिसंबर 2025 से तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए।

जिला प्रशासन ने साफ किया पूरा मामला

आरोपों को भ्रामक बताते हुए खंडवा जिला प्रशासन ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। मनरेगा परियोजना अधिकारी के अनुसार:

  • व्यापक डेटा: जल संचय अभियान के तहत कुल 1,29,046 कार्यों की जिओ-टैग्ड तस्वीरें पोर्टल पर मौजूद हैं।
  • डेस्क वेरिफिकेशन: जल शक्ति मंत्रालय ने इन सभी तस्वीरों का तकनीकी सत्यापन किया है।
  • फील्ड चेक: केवल कागजों पर नहीं, बल्कि कुल कार्यों में से 1 प्रतिशत का रैंडमली फील्ड लेवल पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) भी किया गया था। प्रशासन का तर्क है कि चंद सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर राष्ट्रीय स्तर की चयन प्रक्रिया को फर्जी कहना गलत है।

कावेश्वर पंचायत में क्या हुए विकास कार्य?

कलेक्टर ऋषव गुप्ता द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कावेश्वर में जल संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए गए। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • कावेरी नदी का कायाकल्प: नदी के उद्गम स्थल 'कुंड' का जीर्णोद्धार।
  • रिज टू वैली मॉडल: पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा जल रोकने के लिए वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग।
  • प्रमुख संरचनाएं: लगभग 50 हेक्टेयर में कंटूर निर्माण, 55 गली प्लग, 35 पोखर और तालाबों का निर्माण।
  • तकनीकी समाधान: वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, हैंडपंप और बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट का प्रभावी क्रियान्वयन।

कौन हैं विवाद में आए दोनों IAS अधिकारी?

ऋषव गुप्ता (IAS Rishav Gupta, Collector, Khandwa): 2014 बैच के आईएएस अधिकारी ऋषव गुप्ता प्रशासनिक सेवा में आने से पहले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। उन्होंने निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी की और 2013 की परीक्षा में 37वीं रैंक हासिल कर अपनी योग्यता साबित की।

डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा (IAS Dr Nagarjun B Gowda, CEO, Zila Panchayat): 2019 बैच के आईएएस डॉ. नागार्जुन मूल रूप से कर्नाटक के निवासी हैं। उन्होंने MBBS के बाद डॉक्टर के रूप में सेवाएं दीं और फिर यूपीएससी 2018 में 418वीं रैंक हासिल की। पहले उन्हें मणिपुर कैडर मिला था, लेकिन अंतर-कैडर स्थानांतरण के बाद वे मध्य प्रदेश आए। डॉ. नागार्जुन की पत्नी सृष्टि जयंत देशमुख भी मध्य प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने यूपीएससी 2018 में ऑल इंडिया 5वीं रैंक प्राप्त की थी। दोनों की शादी अप्रैल 2022 में हुई थी।

पोर्टल पर मौजूद फील्ड वेरिफिकेशन का डेटा

फिलहाल, सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और प्रशासन द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बीच बहस जारी है। जहां एक पक्ष एआई के दुरुपयोग की आशंका जता रहा है, वहीं जिला प्रशासन ने अपने पोर्टल और फील्ड वेरिफिकेशन के डेटा को साक्ष्य के तौर पर रखा है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की प्रतिक्रिया इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है।

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