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भोपाल के आयुष्मान अस्पतालों में कैसे हुआ बड़ा घोटाला, फर्जी मरीज व डॉक्टर-नर्सिंग स्टाफ से करोड़ों का गोरखधंधा

Ayushman Hospital scam: राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के कई आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पतालों में फर्जी मरीज भर्ती कर, नकली डॉक्टर-नर्सिंग स्टाफ दिखाकर और जबरन ICU में शिफ्ट कर करोड़ों का क्लेम उठाया जा रहा था।

जांच में भोपाल के कई अस्पतालों की मान्यता रद्द कर दी गई है। इनमें सूर्यांश मल्टी स्पेशलिस्ट, मेट्रो सिटी, साईं अस्पताल, भगवती नर्सिंग होम, प्रभु प्रेम नेत्रालय और एमडीसी अस्पताल शामिल हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) ने गड़बड़ी पकड़ी और 8 अस्पतालों की मान्यता खत्म की। जांच में पता चला कि सामान्य मरीजों को जबरन ICU में भर्ती कर योजना का दुरुपयोग किया जा रहा था।

Ayushman Hospital scam Fake patients nursing staff swindled to tune of crores accreditation revoked

यह घोटाला आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) में बड़ा सेंध माना जा रहा है। भोपाल के अस्पतालों में फर्जी डॉक्टर, नकली नर्सिंग स्टाफ और फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम उठाए गए। कुछ मामलों में मृत मरीजों के नाम पर भी बिल बनाए गए। वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए घोटाले का पूरा खुलासा, रद्द हुई मान्यताएं, जांच की स्थिति और मरीजों पर असर।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य: फर्जी मरीज से ICU तक का खेल

  • राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की जांच में पता चला कि भोपाल के कई प्राइवेट अस्पतालों में:
  • सामान्य बीमारी (जैसे बुखार, डायरिया) के मरीजों को जबरन ICU में शिफ्ट कर महंगे पैकेज का क्लेम।
  • फर्जी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के नाम पर स्टाफ दिखाया।
  • मृत या डिस्चार्ज मरीजों के नाम पर दोबारा क्लेम।
  • NABH सर्टिफिकेट की कमी के बावजूद हाई-रिस्क ट्रीटमेंट के बिल।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "कुछ अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं थे, फिर भी सर्जरी और ICU क्लेम किए गए। यह योजना का खुला दुरुपयोग है।" 2025 में अब तक MP में कई अस्पतालों की मान्यता रद्द हुई। भोपाल में 6 से अधिक अस्पताल प्रभावित। ग्वालियर और सीहोर के अस्पताल भी लिस्ट में।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने 8 अस्पतालों की मान्यता रद्द की:

कारण: जबरन ICU भर्ती, फर्जी क्लेम, स्टाफ की कमी। जांच टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट दी।

मरीजों पर असर: गरीबों का भरोसा टूटा

  • आयुष्मान योजना गरीबों के लिए वरदान है, लेकिन घोटाले से:
  • असली मरीजों को इलाज में दिक्कत।
  • क्लेम रिजेक्ट होने का डर।
  • प्राइवेट अस्पतालों पर भरोसा कम।
  • एक मरीज ने कहा, "कार्ड है, लेकिन अस्पताल पैसे मांगते हैं। अब पता चला क्यों।"
  • सरकार की सख्ती: NABH सर्टिफिकेट अनिवार्य, जांच जारी

स्वास्थ्य विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए:

  • 1 अप्रैल 2026 से NABH सर्टिफिकेट जरूरी।
  • बिना सर्टिफिकेट वाले अस्पताल डी-लिस्ट।
  • 1000+ अस्पतालों की स्क्रीनिंग।
  • फर्जी क्लेम पर FIR और पेनल्टी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "योजना का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं। दोषी अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई।"

विपक्ष का हमला

कांग्रेस ने इसे "BJP राज में घोटाला" बताया। प्रवक्ता: "गरीबों का हक लूटा जा रहा। जांच हो।" BJP: "हमने ही पकड़ा, कार्रवाई की।"

योजना की विश्वसनीयता पर सवाल

भोपाल के आयुष्मान अस्पतालों में फर्जीवाड़ा योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। मान्यता रद्द और जांच से राहत मिलेगी, लेकिन असली मरीजों को न्याय कब? वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।

(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी संवाददाता )

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