MP में I.N.D.I.A. को झटका, क्यों सपा के चुनाव लड़ने से बीजेपी को हो सकता है फायदा?

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी की ओर से 9 उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही यह साफ हो गया है कि कम से कम इस चुनाव में विपक्षी दलों का गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस (इंडिया ब्लॉक)टूट चुका है।

इससे स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को जितनी सीटों पर सपा चुनाव लड़ेगी, वहां कांग्रेस का बीजेपी से सीधा टक्कर होने के बजाए, इंडिया ब्लॉक के वोटों में बंटवारा होगा और आखिरकार 28 विपक्षी दलों के मूल एजेंडे पर पानी फिर जाएगा।

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एमपी चुनाव में इंडिया ब्लॉक का टूट गया गठबंधन
यही नहीं इससे 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी दोनों दलों में सीटों के तालमेल को लेकर होने वाली बैठकों पर असर पड़ सकता है। खासकर उत्तर प्रदेश में। दरअसल, एमपी चुनाव के लिए जैसे ही कांग्रेस ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की, अखिलेश यादव की पार्टी की ओर से भी 230 सीटों वाले चुनाव में 9 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम सामने आ गए।

सपा की ओर से अभी जारी हुए हैं 9 उम्मीदवारों के नाम
सपा ने मध्य प्रदेश में जिन 9 उम्मीदवारों के नाम पर अभी मुहर लगाई है, उनमें मीरा दीपक यादव (निवाड़ी), ब्रिज गोपाल पटेल उर्फ बबलू पटेल (राजनगर), डीआर राहुल (भांडेर-सुरक्षित), विश्वनाथ सिंह मरकाम (धौहनी-सुरक्षित), श्रवण कुमार सिंह गोंड (चितरंगी-सुरक्षित), लक्ष्मण तिवारी (सिरमौर), मनोज यादव (बिजावर), महेश सहारे (कटंगी) और राम प्रताप यादव (सीधी) शामिल हैं। वैसे सपा सूत्रों के अनुसार 6 नाम पहले ही सामने थे, जिनमें तीन और जोड़ दिए गए हैं।

बिजावर सीट से सामने आई इंडिया ब्लॉक की दरार
मध्य प्रदेश में विपक्षी गठबंधन में दरार पड़ने का संकेत बिजावर सीट को देखने से मिल सकता है। छतरपुर जिले की इसी एकमात्र सीट से 2018 में सपा को जीत मिली थी। लेकिन, कांग्रेस ने वहां के लिए भी अपने प्रत्याशी चरण सिंह यादव को उतारकर समाजवादी पार्टी के नेताओं के सामने एक तरह से चुनौती खड़ी कर दी थी। अब यहां भाजपा के उम्मीदवार के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशी को सपा उम्मीदवार मनोज यादव का भी सामना करना पड़ेगा।

कांग्रेस को पिछली बार नहीं मिला था पूर्ण बहुमत
अब जरा इस सीट के बैकग्राउंड में चलकर देखिए। पिछली बार कांग्रेस राज्य विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी थी, लेकिन सामान्य बहुमत के आंकड़े से 2 सीटें पिछड़ गई थी। तब 2 बसपा, 1 सपा और 4 निर्दलीय विधायकों के बाहर से समर्थन के दम पर कमलनाथ ने कांग्रेस की सरकार बनाई थी। बाद में जब कांग्रेस की सरकार गिर गई तो सपा विधायक राजेश शुक्ला ने बीजेपी की ओर पलटी मार ली थी। इसलिए इस बार सपा ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है।

एमपी में लगातार बढ़ा है सपा का जनाधार
राज्य में समाजवादी पार्टी का पिछले दो चुनावों से जनाधार लगातार बढ़ता नजर आया है। जैसे 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने प्रदेश में 164 उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को सीट तो एक भी नहीं मिली थी, लेकिन उसे कुल 4,04,853 वोट मिले थे, जो कि कुल मतदान का 1.20% था। लेकिन, 2018 में सपा का प्रदर्शन इससे काफी बेहतर हुआ था। पार्टी ने सिर्फ 52 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और उसे 1 सीट पर जीत मिली थी।

इस चुनाव में पार्टी का वोट भी कम सीटों पर लड़ने के बावजूद बढ़ गया था। तब उसे 4,96,025 वोट मिले जो कुल वोट शेयर का 1.30% था। वहीं जहां पार्टी लड़ी थी, वहां उसका कुल वोट शेयर 6.26% था, जो इसके पहले वाले चुनाव में सिर्फ 1.70% दर्ज किया गया था।

बीजेपी को हो सकता है फायदा?
जाहिर है कि अगर सपा और कांग्रेस में यहां सीटों पर तालमेल होता तो भाजपा-विरोधी वोटों के बंटवारे की संभावना नहीं थी। अब जितनी सीटों पर समाजवादी पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी, वहां भाजपा-विरोधी वोट मिलने से उसे फायदा हो सकता। इसकी अहमियत इसलिए भी ज्यादा है कि 2018 में वोट शेयर के मामले में बीजेपी (41.02%), कांग्रेस (40.89%) से आगे रही थी। दोनों के बीच सीटों में भी सिर्फ 5 का फासला रह गया था।

क्यों है विपक्षी गठबंधन के लिए झटका?
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक की पार्टियों का एकजुट नहीं होना इस गठबंधन के लिए इस वजह से झटका है, क्योंकि 13 सितंबर को दिल्ली में इसकी समन्वय समिति की बैठक में इस मसले पर चर्चा भी हुई थी। ईटी को सपा के राज्यसभा सांसद जावेद अली ने बताया, 'राज्य चुनावों में इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के बीच गठबंधन का मुद्दा बैठक में उठाया गया था।'

सूत्रों के अनुसार सपा के नेता मध्यप्रदेश चुनाव में गठबंधन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में थे। सपा के एक सूत्र के मुताबिक, 'हालांकि, मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नेता राज्य विधानसभा चुनाव में सहयोगियों के साथ गठबंधन के लिए उत्सुक नहीं थे....।'

वैसे कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम कमलनाथ ने सोमवार को ये तो कहा है कि इंडिया ब्लॉक का फोकस लोकसभा चुनावों पर है, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि अगर मध्य प्रदेश विधासभा चुनावों में भी गठबंधन हो जाता तो ठीक था।

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