Mothers Day 2023: 'एड की दुनिया में माओं का वर्चस्व' घी, अचार, सोना... हर जगह सिर्फ Maa
Mothers Day 2023: मां के चरणों में स्वर्ग और आंचल में मोहब्बत होती है। मां ही जीवन का अस्तित्व है और वो ही आधार।

Mothers Day 2023: 'मां' वो शब्द है, जिसके आगे दुनिया ही नहीं भगवान भी नतमस्तक है। मां के लिए उसकी औलाद से बढ़कर कुछ भी नहीं है और बच्चे चाहे जो कुछ भी कहें लेकिन उन पर सबसे ज्यादा असर मां का ही होता है। मां से ही तो जीवन है। मां की महिमा का वर्णन शब्दों में किया ही नहीं जा सकता है। मां का दुलार, प्यार, गुस्सा, डांट, झगड़ा सबकुछ अनमोल है, वो गुस्साती भी है तो अपने बच्चे की भलाई के लिए और प्यार तो उसका अपने बच्चे के लिए होता ही है क्योंकि उसका रिश्ता अपने बच्चे से हर रिश्ते की तुलना में नौ महीने ज्यादी जो होता है।
मां के रूप अलग-अलग
मां अच्छी बुरी नहीं होती, वो बस मां होती है और ये बात हमारे विज्ञापन जगत के लोग भी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं और इसी वजह से ही विज्ञापन जगत में मां का ही बोल-बाला है। हां वहां के मां के रूप अलग-अलग जरूर हैं। कभी वो सलवार-कमीज पहनकर अपनी बेटी के सेनिटरी पैड्स के बारे में जानकारी देती है तो कहीं वो जींस पहनकर रसोई में फलों के जूस के फायदे बताती है। तो कहीं वो साड़ी पहनकर नवजात के डाइपर बेचती हैं तो कहीं वो सुपरवूमन बनकर रसोई के मसालों की खूबी बताती है।
वो जो कहती है उसे जनता मान लेती है
कभी वो किसी मशहूर ज्वैलरी ब्रांड की तारीफ करती दिखती हैं तो कभी वो मोबाइल पर वीडियो कॉल करके सात समंदर दूर बैठे अपने बच्चे को मैगी बनाना बताती है। मतलब कहने का यही है कि विज्ञापन जगत में मां ही वर्चस्व है और उसकी वजह सिर्फ इतनी ही है कि वो मां है, जो कि कभी भी झूठ नहीं बोलती हैं और इसलिए वो जो कुछ भी कहती है उसे जनता मान लेती है।
मां एक विश्वास का नाम है...
इस बात का सीधा मतलब सिर्फ यही है कि मां एक विश्वास का नाम है और वो केवल पूज्यनीय है। ऊपर वाले को किसी ने नहीं देखा लेकिन मां उसी का रूप है, वो जननी है और जो जीवन देता है वो ही तो भगवान है, वो सिर्फ देती है और लेती कुछ भी नहीं।
'मदर्स डे' आज
मां का कर्ज तो कोई नहीं उतार सकता लेकिन हम उन्हें प्यार और सम्मान देकर उनके और करीब जा सकते हैं और उन्हें खुश कर सकते हैं। आपको बता दें कि मई महीने के दूसरे संडे को 'मदर्स डे' मनाया जाता है। आज का आप अपनी मां के लिए स्पेशल बना सकते हैं उन्हें अपना दुलार और साथ देकर। दुनिया की समस्त मांओं को वनइंडिया परिवार भी इस खास दिन का बहुत सारी शुभकामनाएं देता है। हैप्पी मदर्स डे !
कुछ खास बातें
- मई महीने के सेंकड संडे को मदर्स डे होता है।
- 9 मई 1914 को औपचारिक रूप से पहला मदर्स डे मनाया गया था।
- इस डे की शुरुआत अमेरिका में हुई लेकिन अब ये दिन केवल यूरोप, भारत जैसे की देशों में मनाया जाने लगा।
- अमेरिकन एक्टिविस्ट एना जार्विस इतिहास में 'मदर्स डे' के फाउंडर के रूप में जाना जाता है।
- उनकी मां की इच्छा थी कि साल में एक दिन मां के नाम पर होना चाहिए लेकिन वो जीते-जी ऐसा कर नहीं पाई थीं।
- लेकिन उनके निधन के बाद एना ने इसके लिए आंदोलन चलाया और आखिरकार वो इसमें सफल हुईं।












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