Mpox Alert: एयरपोर्ट से लेकर अस्पतालों को जारी हुई चेतावनी, भारत में वायरस से निपटने की क्या है तैयारी?
Monkey Pox Virus Alert in India: एमपॉक्स (Mpox), जिसे मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता है। यह वायरस लगातार विदेशों में अपने पैर पसार रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंकीपॉक्स को अंतरराष्ट्रीय चिंता की जनस्वास्थ्य आपात स्थिति (पीएचईआइसी) घोषित किया है। यह जानलेवा बीमारी अफ्रीका के कई हिस्सों समेत देश के अलग-अलग भागों में फैली हुई है। हालांकि, अपना भारत एमपॉक्स वायरस से खुद को बचाए हुए है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार एमपॉक्स की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने निर्देश दिया है कि निगरानी बढ़ाई जाए और मामलों का तुरंत पता लगाने के लिए उपाय किए जाएं। इसी कडी में, सरकार के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि देश के अस्पताल और हवाईअड्डों को अलर्ट कर दिया गया है।आइए जानते हैं क्या है भारत की तैयारी?

- अस्पतालों को चकत्ते वाले मरीजों की पहचान करने और उनके लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार करने के निर्देश।
- हवाई अड्डों को अलर्ट करने सहित एहतियाती कदम उठाने के निर्देश।
- आपातकालीन वार्ड तैयार करने के निर्देश।
- दिल्ली में तीन नोडल अस्पताल - सफदरजंग, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया अस्पताल - को इसके लिए चिह्नित किया गया।
- संदिग्ध मरीजों पर आरटी-पीसीआर और नाक से स्वाब की जांच की जाएगी।
- हवाई अड्डों को भी आवश्यक सावधानी बरतने के लिए सतर्क कर दिया गया है।
दो साल में दूसरी बार WHO का अलर्ट
साल 2022 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एमपॉक्स संक्रमण के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने को लेकर पहली बार आगाह किया था। यह दूसरी बार है, जब एमपॉक्स को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। वायरस के एक नए प्रकार ने इसकी क्षमता बढ़ा दी है, जो यौन संपर्क सहित नियमित निकट संपर्क के माध्यम से अधिक आसानी से फैलता है।
भारत अभी अछूता, पाकिस्तान झेल रहा
भारत में अभी तक एमपॉक्स के नए स्ट्रेन का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, 16 अगस्त को पाकिस्तान में एमपॉक्स के तीन मरीज पाए गए , जो यूएई से देश में आए थे। इससे पहले स्वीडन ने अफ्रीका के बाहर एमपॉक्स के पहले मामले की पुष्टि की थी।
एक साल में 30 मामले दर्ज, ज़्यादातर विदेशी
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जून 2022 से मई 2023 तक 30 एमपॉक्स मामले सामने आए हैं, जिनमें से ज़्यादातर विदेशी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले स्ट्रेन की तुलना में मृत्यु की संभावना बहुत ज़्यादा है। एक अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों ने चेचक के टीके लगवाए हैं, उन्हें संक्रमण नहीं होगा। अभी किसी टीके की जरूरत नहीं है।
15,600 से ज़्यादा मामले और 537 मौतें
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में एमपॉक्स की रिपोर्ट एक दशक से भी ज़्यादा समय से आ रही है, और हर साल रिपोर्ट किए जाने वाले मामलों की संख्या में उस अवधि में लगातार वृद्धि हुई है। पिछले साल, रिपोर्ट किए जाने वाले मामलों में काफ़ी वृद्धि हुई, और इस साल अब तक रिपोर्ट किए जाने वाले मामलों की संख्या पिछले साल की कुल संख्या से ज़्यादा हो गई है, जिसमें 15,600 से ज़्यादा मामले और 537 मौतें शामिल हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
- ईटीहेल्थवर्ल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अशोका यूनिवर्सिटी में कोइता सेंटर फॉर डिजिटल हेल्थ के प्रमुख डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि एमपॉक्स कोई नई बीमारी नहीं है। चेचक की तरह, यह पहली बार 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में मनुष्यों में पाया गया था, जो मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के देशों को प्रभावित करता था। कांगो बेसिन में देखा गया क्लेड I, मनुष्य से मनुष्य में कम फैलता था, लेकिन इससे अधिक गंभीर संक्रमण और मौतें होती थी।
- पश्चिम अफ्रीका में देखा गया क्लेड II अधिक व्यापक रूप से फैला, लेकिन हल्के संक्रमण के साथ। जुलाई 2022 में शुरू होने वाला बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रकोप क्लेड IIb था। यह मुख्य रूप से पुरुषों के बीच यौन संपर्क से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि 2022 एमपॉक्स का प्रकोप ज्यादातर स्व-सीमित बीमारी थी, जिसमें मृत्यु दर कम थी। इसके बावजूद लगभग 200 मौतें हुईं, ज्यादातर उन देशों में, जिन्होंने पहले कभी एमपॉक्स की रिपोर्ट नहीं की थी।
- भारत में इसके प्रकोप को रोकने के लिए डॉ. अग्रवाल ने सुझाव दिया कि हम जो सबसे अच्छा रोकथाम कदम उठा सकते हैं, वह वे हैं, जो संक्रमण को हम तक पहुंचने से रोकते हैं। SARS-CoV2 महामारी के दौरान हमने जो क्षमता विकसित की है - टीके, जीनोमिक निगरानी - उसका उपयोग वैश्विक दक्षिण-दक्षिण सहयोग के हिस्से के रूप में किया जा सकता है।
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