'15 सालों में बनेगा अखंड भारत', भागवत के बयान पर राउत का पलटवार, 'साल नहीं, 15 दिनों में PoK जोड़िए'
'15 सालों में बनेगा अखंड भारत', भागवत के बयान पर राउत का पलटवार, 'साल नहीं, 15 दिनों में PoK जोड़िए'
नई दिल्ली, 14 अप्रैल: आरएसआर प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 15 सालों में भारत के एक अखंड राष्ट्र बनेगा। उत्तराखंड के हरिद्वार में मोहन भागवत ने कहा कि सनातन धर्म ही हिंदू राष्ट्र है। 15 सालों में भारत फिर से अखंड भारत बनेगा और यब सब हम अपनी आंखों से देखेंगे। मोहन भागवत के बयान पर शिवसेना के संजय राउत ने पलटवार किया है। संजय राउत ने कहा, ''आरएसआर चीफ मोहन भागवत ने कहा कि 15 साल में भारत फिर से अखंड राष्ट्र बनेगा, मैं कहता हूं सबसे पहले पीओके को जोड़ना होगा, सबसे पहले पीओके को भारत में शामिल करना है और फिर पाकिस्तान, श्रीलंका और अन्य को भी अखंड भारत बनाना है। लेकिव इसे 15 दिनों में करने का वादा करें और 15 साल में नहीं।''

मोहन भागवत ने कहा, ''हम अहिंसा की ही बात कहेंगे लेकिन ये बात हाथों में डंडा लेकर नहीं कहेंगे। हमारे मन में कोई द्वेष, शत्रुता भाव नहीं है लेकिन दुनिया शक्ति को ही मानती है तो हम क्या करें। जो भी तथाकथित लोग सनातन धर्म का विरोध करते हैं, उनका भी उसमें सहयोग है, अगर वह विरोध न करते तो हिंदू जागता नहीं क्योंकि वह तो सोता रहता है।''
#WATCH First POK is to be included in India & then Pak, Srilanka &others also make Akhand Bharata. No one is stopping you.But promise to do it in 15 days & not 15 yrs: Shiv Sena's Sanjay Raut on RSS chief Mohan Bhagwat's reported remarks that"Akhand Bharat will be made in 15 yrs" pic.twitter.com/QZD2RT12v6
— ANI (@ANI) April 14, 2022
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हरिद्वार में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि "धर्म" को बढ़ावा देने के प्रयासों से भारत का उदय होगा। उन्होंने कहा, "धर्म और भारत पर्यायवाची हैं और भारत माता के बच्चों के रूप में, हमें" सनातन धर्म के कारण को चैंपियन बनाना चाहिए ... अपने लक्ष्य की ओर भारत की यात्रा पहले ही शुरू हो चुकी है। आगे बढ़ते हुए, इस यात्रा को केवल त्वरण और कोई ब्रेक नहीं देखना चाहिए।"
आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा, "एक हजार से अधिक वर्षों तक, हमें नष्ट करने के प्रयास किए गए लेकिन हमने अपने धर्म को बरकरार रखा और इसकी शक्ति ने हमें जीवित रहने में मदद की। भारत तब तक नहीं रुकेगा जब तक वह देश नहीं बन जाता, जिसका स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदो ने सपना देखा था। वर्तमान पीढ़ी को एक "धर्म-प्राण भारत" यानी धर्म को अपनी आत्मा के रूप में देखने को मिलेगा। भागवत ने आगे कहा, "भारत अहिंसा के रास्ते पर चलना जारी रखेगा, लेकिन अपनी रक्षा के लिए अपनी रक्षा शक्ति भी बढ़ाएगा और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल करेगा।"












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