'अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में चीन पैंगोंग झील पर बना रहा पुल', संसद में सरकार ने दिया जवाब
नई दिल्ली, 5 फरवरी: पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर चीन अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में पुल बना रहा है। इसकी जानकारी शुक्रवार को भारत सरकार ने संसद में दी। साथ ही कहा कि वो अन्य देशों से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपेक्षा करता है। लद्दाख में पिछले दो साल से भारत और चीन के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। जिसको सुझलाने के लिए दोनों देशों ने 14 बार कोर कमांडर लेवल की बैठक की।

संसद में एक लिखित जवाब में सरकार ने कहा कि उन्होंने चीन द्वारा पैंगोंग झील पर बनाए जा रहे एक पुल पर ध्यान दिया है। ये पुल उन क्षेत्रों में बनाया जा रहा है जो 1962 से चीन के अवैध कब्जे में है। भारत सरकार ने इस अवैध कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है। साथ ही कई मौकों पर ये स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है। हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे।
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सरकार ने आगे कहा कि चीन से कई दौर की वार्ताएं हुई हैं। जिसमें तीन प्रमुख सिद्धांतों पर ध्यान दिया गया। इसमें पहला है कि दोनों पक्ष कड़ाई से एलएसी का सम्मान और पालन करेंगे, जबकि दूसरा है कि कोई भी पक्ष वहां पर एकतरफा यथास्थिति को बदलने का प्रयास नहीं करेगा। वहीं तीसरा दोनों पक्षों के बीच सभी समझौतों का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।
अरुणाचल पर कही ये बात
हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों का नाम अपनी भाषा में बदला है। इस पर सरकार ने कहा कि ये एक व्यर्थ प्रयास है। नाम बदलने से तथ्य नहीं बदलते, अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा।












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