रेलवे के निजीकरण के साथ अब IRCTC में अपना हिस्सा बेच सकती है मोदी सरकार
नई दिल्ली: रेलवे के निजीकरण के साथ मोदी सरकार अब एक नई योजना पर भी काम कर रही है। जिसके तहत वो इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी IRCTC में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी। IRCTC समेत कई सेक्टर में विनिवेश के जरिए सरकार वित्त वर्ष 2020-21 में 2.1 लाख करोड़ जुटाना चाहती है। पहले रेलवे के जरिए केंद्र की इसमें 100 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, लेकिन पिछले साल आईपीओ के जरिए मोदी सरकार ने इसमें हिस्सेदारी 12.6 फीसदी घटा दी थी।
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11 सिंतबर से शुरू हो सकती है प्रक्रिया
सीएनबीसी-आवाज की रिपोर्ट के मुताबिक विनिवेश विभाग की ओर से सरकार के इस फैसले पर काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही IRCTC में हिस्सेदारी बेचने के लिए मर्चेंट बैंकर और सेलिंग ब्रोकर्स की नियुक्ति की गई है। ये बिक्री ओएसएस रूट के जरिए होने की खबर है। साथ इसकी नीलामी की प्रक्रिया 11 सितंबर से सरकार शुरू कर सकती है।

IRCTC के जिम्मे कई अहम काम
आपको बता दें कि IRCTC भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी है। भारतीय रेलवे की सभी ट्रेनों की ऑनलाइन टिकट बुकिंग इसी के जरिए होती है। इसके अलावा IRCTC ट्रेनों में खाने-पीने की भी व्यवस्था करता है। रेलवे के कई टूरिज्म प्रोग्राम IRCTC की ओर से ही ऑपरेट किए जाते हैं। इसके अलावा IRCTC की आय के कई जरिए हैं। सितंबर 2019 में सरकार ने आईओपी के जरिए अपनी हिस्सेदारी 12.6 फीसदी घटाई थी।

क्या होता है OFS?
OFS को आमभाषा में ऑफर फॉर सेल कहते हैं, यानी सरकार अब IRCTC में अपने हिस्से को बेच देगी। ओएफएस रूट के तहत कोई भी लिस्टेड कंपनी एस्कचेंज प्लेटफॉर्म पर खुद ही शेयर बेचती है। इसमें एक खास विंडो होता है, जिसके जरिए 200 टॉप कंपनियों की सुविधा मिलेगी। इसमें कम से कम 25 फीसदी शेयर म्यूचुअल फंड या फिर बीमा कंपनियों जैसे संस्थागत निवेशकों के लिए रिजर्व में रखने पड़ते हैं।












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