PM जन-धन योजना के 10 साल पूरे, महिलाओं के लिए बनी 'वरदान', भाजपा का वोटबैंक भी हुआ मजबूत
10 Years of Jan Dhan Yojana: केंद्र की मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता संभाल रही है। प्रधानमंत्री लगातार तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में एनडीए सरकार की प्रमुख और बहुप्रचारित प्रधानमंत्री जनधन योजना (Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana- PMJDY) को आज 10 साल पूरे हो गए हैं।
बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए केंद्र ने ज्यादा से ज्यादा लोगों और ग्रामीण क्षेत्र को कवर करने के लिए अपनी योजना बनाई है। अपने पहले कार्यकाल से दौरान पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2014 को ऐतिहासिक लाल किले से इस योजना का ऐलान किया था, जिसे 28 अगस्त 2014 को पूरे देश में लागू की गई।

जानिए क्या था इस योजना का मकसद?
दरअसल, साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो सामान्य लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत की गई। जिसका मकसद लोगों का शून्य पर बैंक अकाउंट खोलना था, जिससे सरकारी योजनाओं का फायदा लोगों को सीधे यानी डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) से मिल सकें। इन खातों के जरिए लोगों का सेविंग अकाउंट खुल पाया, जिससे लोन की रास्ता आसान हुआ। इसी के साथ इंश्योरेंस और पेंशन सुविधा भी सुनिश्चित हो पाई।
कोविड महामारी में सीधे खाते मेें आए पैसे
कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना के तहत नए खोले गए बैंक खातों के माध्यम से सबसे कमजोर लोगों को पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा देकर मील का पत्थर हासिल किया। मौजूदा वक्त में लगभग 54 करोड़ जन धन खाते हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार कुल 53.13 करोड़ जनधन अकाउंट हैं। इन अकाउंट में से 30 करोड़ अकाउंट महिलाओं के हैं। 35 करोड़ अकाउंट ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खुले हैं।
PM मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन-धन योजना के 10 साल पूरे होने पर पोस्ट के जरिए लाभार्थियों को बधाई दी। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि, "आज देश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है- #10YearsOfJanDhan। इस अवसर पर मैं सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं देता हूं। इस योजना को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक करने वाले सभी लोगों को भी बहुत-बहुत बधाई। जन धन योजना करोड़ों देशवासियों, विशेषकर हमारे गरीब भाई-बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देने में सफल रही है।"
बचत खाते वाली महिलाओं की बढ़ी संख्या
वित्तीय स्वतंत्रता भाजपा के लिए एक प्रमुख राजनीतिक रणनीति बन गई है। असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को अपने पूरे करियर में आर्थिक कमजोरियों का सामना करना पड़ता है। जन धन योजना ने इस लैंगिक अंतर को पाटने में मदद की है। बैंक या बचत खाते वाली महिलाओं का प्रतिशत 2015-2016 में 53% से बढ़कर 2019-2021 में 79% हो गया।
महाराष्ट्र ने हाल ही में राज्य चुनावों से पहले महिलाओं के खातों में सीधे जमा की घोषणा की है। यह रणनीति मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए सफल साबित हुई, और उनका लक्ष्य महाराष्ट्र में भी इसे दोहराना है। बिना किसी तामझाम, न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता और रुपे डेबिट कार्ड की सुविधा के साथ, सरकार जन धन खातों की पहुंच को व्यापक बनाने की उम्मीद करती है।
ग्रामीण क्षेत्र का विकास और संतुलन
जन धन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन पर सरकार के फोकस ने ग्रामीण क्षेत्रों को काफी प्रभावित किया है। यह सुनिश्चित करके कि दूरदराज के घरों तक भी बैंकिंग सेवाओं की पहुंच है, इस योजना ने ग्रामीण विकास के प्रक्षेपवक्र को आगे बढ़ाया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यह संतुलित पहुंच इसकी व्यापक स्वीकृति का प्रमाण है।
भाजपा का वोटबैंक हुआ मजबूत
महिला शक्ति ने भाजपा को प्रमुख राज्यों में सत्ता हासिल करने में मदद की है और महाराष्ट्र और हरियाणा में राज्य चुनावों से पहले, जहां पार्टी महिला मतदाताओं पर निर्भर है। यह वित्तीय स्वतंत्रता बदलाव का कारक हो सकती है।
महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना मतदाताओं की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। भाजपा की रणनीति आगामी चुनावों में वोट हासिल करने के लिए इस सशक्तीकरण का लाभ उठाने पर टिकी है। पासबुक और डेबिट कार्ड की सरलता महिला मतदाताओं को जीतने में सहायक हो सकती है।
जन धन योजना की सफलता की कहानी सिर्फ़ आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय स्थिरता और स्वतंत्रता प्रदान करके जीवन को बदलने के बारे में भी है। अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए इस योजना का लक्ष्य भारत भर में अंतर को पाटना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।












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